हिमाचल में सक्रिय राजनीति से शांता युग की विदाई
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वर्ष 1963-65 में पंच बनने के बाद हिमाचल में भाजपा को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाकर पार्टी के भीष्म पितामह शांता कुमार के युग की विदाई ने सूबे में सियासत के नए समीकरणों को जन्म दिया है। 13,37,838 मतदाताओं वाली कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट में भाजपा के उदय के बाद ऐसा पहली बार होगा जब चुनाव शांता कुमार के सक्रिय राजनीति में नहीं होने के दौरान होंगे।
भाजपा के 75 वर्ष की आयु के फार्मूले से बाहर होने के बाद 85 वर्षीय शांता कुमार ने सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई का रास्ता ही चुना। विधानसभा चुनाव के दौरान अपने ही विस क्षेत्र में पसंद के उम्मीदवार का टिकट कटने से खफा शांता कुमार आगे के कदम फूंक-फूंक कर रख रहे थे।
हाईकमान से नाराजगी के बावजूद धूमल से अपने सियासी निपटारे के बाद अपनी पसंद का सीएम जयराम ठाकुर के रूप में बनवाया। पुराने नेताओं को हाशिये पर धकेलने की सियासी हवा को भांपकर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने की कभी भी अपनी व्यक्तिगत इच्छा जाहिर नहीं की।
पंच बनने के बाद रचे कई इतिहास
वरिष्ठ नेता आडवाणी का टिकट कटने के बाद उन्होंने तुरंत अमित शाह के समक्ष जाकर सम्मानजनक विदाई का फैसला चुना। हालांकि, कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से नए संभावित उम्मीदवार किशन कपूर की जीत का दारोमदार अभी भी शांता कुमार पर टिका रहेगा।
नो वर्क नो पे नियम, पानी से हजारों करोड़ रुपये की रॉयल्टी और अंत्योदय योजना लागू कर देश भर में ख्याति पाने वाले शांता कुमार अपनी जन्मस्थली गढ़जमूला में 1963-65 के बीच पंच, 1965-70 में पंचायत समिति भवारना के अध्यक्ष रहे। 1977-80 और 1990-92 में दो बार मुख्यमंत्री रहे। 1989, 1998, 1999 और वर्ष 2014 में शांता कुमार चार बार लोकसभा सांसद और दो बार केंद्रीय मंत्री रहे।
पहली बार बनेगा गद्दी नेता उम्मीदवार, दोनों हाथ में होंगे लड्डू
कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से अगर खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर लोकसभा उम्मीदवार बने तो गद्दी समुदाय इतिहास रचेगा। किशन कपूर गद्दी समुदाय से पहले लोकसभा उम्मीदवार होंगे।
करीब तीन लाख मतदाताओं वाले गद्दी समुदाय से किशन कपूर चंबा में अपने ससुराल होने की दुहाई देकर क्षेत्रवाद को भी साधने का प्रयास करेंगे। अगर कपूर प्रत्याशी बने तो उनके दोनों हाथ में सियासी लड्डू होंगे। अगर किशन कपूर जीते तो लोकसभा के सदन में जाएंगे और हारे तो धर्मशाला से विधायक बने रहेंगे।
क्षुब्द त्रिलोक ने खुद को बताया बदनसीब
टिकट की आधिकारिक घोषणा से पहले ही भाजपा में अंदरूनी द्वंद्व भी बाहर आने लगा है। टिकट की दौड़ से बाहर होने के बाद त्रिलोक कपूर ने कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के लोगों को व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर खुद को बदनसीब बताया। उन्होंने लिखा कि वह टिकट की लड़ाई हार गए। वे किशन कपूर व त्रिलोक कपूर में कोई अंतर न समझे। अंत में त्रिलोक ने लिखा आपका बदनसीब साथी।