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मशहूर लेखक राजेंद्र यादव के लिए खूबसूरत भ्रम थी स्नोवा बॉर्नो

Fri, 16 Oct 2015 10:43 AM IST
Updated Fri, 16 Oct 2015 10:43 AM IST
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famous writer rajender yadav letters to snowa borno.

मशहूर लेखक और चर्चित पत्रिका हंस के संपादक राजेंद्र यादव के लिए स्नोवा एक खूबसूरत भ्रम थी। पर फिर भी वे स्नोवा के भ्रम को जीवित रखना चाहते थे। स्नोवा को लिखे राजेंद्र यादव एक पत्र की चंद पंक्तियां देखिए...सचमुच मुझमें साहस नहीं है कि अपने पाठकों को यह बताऊं कि स्नोवा नाम की कोई लड़की ही नहीं है जो इस तरह की कहानियां लिख सकती है।

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यदि यह भ्रम है तो इस खूबसूरत भ्रम को इसी तरह चलने दो। साहित्यिक जगत के मूर्धन्य संपादक स्व. राजेंद्र यादव ने ऐसी कई चिट्ठियां मनाली की कथित लेखिका स्नोवा बॉर्नो के नाम लिखी थीं। अमर उजाला के पास मौजूद इन चिट्ठियों के मजमून पर गौर करें तो स्वयं हंस (चर्चित पत्रिका) के संपादक स्नोवा की लेखनी पर फिदा थे।
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एक खत में राजेंद्र लिखते हैं
..प्रिय स्नोवा, एक व्यक्तिगत जानकारी दे सको तो मुझे संतोष होगा। सन् 1960-61 में मैं कुल्लू-मनाली के बीच रायसन (कटराईं) में लगभग डेढ़-दो महीने जॉनसन आर्चड में अपनी एक मित्र के साथ रहा था। यह जगह कुल्लू के नग्गर से दो-ढाई किलोमीटर पहले थी। क्या यह जगह इसी नाम से है या इसका नाम बदल गया है? कुछ रुक कर पत्र में लिखा ‘बारदो’ (स्नोवा के नाम से छपी बहुचर्चित कहानी) को शेड्यूल करूंगा। आशा है तुम फोटो में जैसी दिखाई देती हो वैसी स्वस्थ और प्रसन्न हो। इस बार कहानी (बारदो) में यही तस्वीर जाएगी।

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स्नोवा के भ्रम को जीवित रखना चाहते थे राजेंद्र यादव

famous writer rajender yadav letters to snowa borno.

हालांकि उन्हें शक था कि ये कहानियां स्नोवा के नाम से कोई और लिखता है। फिर भी उन्होंने स्नोवा से पत्र व्यवहार जारी रखा। संभवतया अपने एक खत में स्नोवा ने हिमाचल के कथाकार सैनी अशेष की कहानियां छापने की सिफारिश राजेंद्र यादव से की थी। लेकिन जवाब में राजेंद्र यादव ने कहा- अशेष की कहानी का आग्रह मत करो। कभी संभव हुआ तो उसे तुम्हारे नाम से ही दे दूंगा।

ठीक है न? जाहिर है कि राजेंद्र यादव को स्नोवा के होने, न होने के बजाय उसके नाम से छपने वाली कहानियों में ज्यादा दिलचस्पी थी। संभवतया राजेंद्र यादव को भी संदेह था कि स्नोवा के नाम से अशेष ही ये कहानियां भेज रहे हैं। पर वह स्नोवा को जिंदा रखना चाहते थे।

इस रहस्यमयी लेखिका से अभी तक नहीं उठ सका है पर्दा

famous writer rajender yadav letters to snowa borno.

विज्डम हाउस, पोस्ट बॉक्स नंबर 81, मनाली, (हि.प्र.)। यह पता है रहस्यमयी और विवादित लेखिका स्नोवा बॉर्नो का। लेखकों और साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों की ओर से स्नोवा को भेजे खत आखिर कौन लेता रहा। ये खत कहां जाते थे। इन सब सवालों पर कथित स्नोवा के भाषा गुरु सैन्नी अशेष ने चुप्पी तोड़ी है।

उनका कहना है कि उनकी टीम में जीवन और मृत्यु के रहस्यों का उद्घाटन करने वाले लोग अनेक उपायों से साहित्य को नई तरह की रचनाएं देते आए हैं। इनमें अशेष और स्नोवा की ढाई हजार बाल कहानियां भी शामिल हैं, जो आठ भाषाओं में पढ़ी जा चुकी हैं। बकौल अशेष स्नोवा के खत उनके पास हैं और उनके खत स्नोवा के पास हो सकते हैं। हालांकि, स्नोवा है या नहीं इस सवाल पर वह खुल कर कुछ नहीं बोले।

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