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विशेष बातचीत: प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल बोले- शब्द वही, लेकिन लिखने का माध्यम बदला

Fri, 17 May 2024 11:57 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 May 2024 11:57 AM IST
सार

कला समीक्षक और प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल ने कहा कि समय के साथ-साथ कविताएं, कहानियां और रचनाओं को लिखने के माध्यम में बदलाव जरूर है, लेकिन शब्द अभी भी वही हैं। 

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Famous writer Prayag Shukla said- the words are the same, but the medium of writing has changed
प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समय के साथ-साथ कविताएं, कहानियां और रचनाओं को लिखने के माध्यम में बदलाव जरूर है, लेकिन शब्द अभी भी वही हैं। युवा ज्यादातर हर काम के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं। समय के साथ चलने के लिए यह जरूरी भी है। अगर सोशल मीडिया का सही उपयोग करें, तो उससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह बात कला समीक्षक और प्रख्यात साहित्यकार प्रयाग शुक्ल ने भारती शर्मा से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि शिमला से एक खास संबंध है। यहां पहुंचते ही मन प्रसन्न हो जाता है। शिमला से संबंध रखने वाले साहित्य से जुड़े बहुत से मित्रों की याद आती है। हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार रामकुमार, स्वामीनाथन, निर्मल वर्मा, कृष खन्ना, अमृता श्री और हिम चटर्जी समेत कई मित्रों के साथ शिमला से जुड़ी बहुत सी यादें जहन में हैं। 

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जन्म :28 मई 1940 | कोलकाता
काम :  कवि, कथाकार, समीक्षक
काव्य-संग्रह ‘कविता संभव’, ‘यह एक दिन है’, ‘अधूरी चीज़ें तमाम’, ‘बीते कितने बरस’, ‘यह जो हरा है’, ‘यहाँ कहाँ थी छाया’, ‘इस पृष्ठ पर’, ‘सुनयना फिर यह न कहना’

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सवाल :  शिमला में क्या बदलाव महसूस कर रहे हैं ?
जवाब- वैसे तो मैं शिमला कई बार आ चुका हूं, लेकिन इस बार करीब छह से सात साल बाद आना हुआ। इस बार शिमला पहुंचने पर अच्छा महसूस हुआ। हालांकि पेड़-पौधे कम हो गए हैं, लेकिन यहां की सुंदरता और हरियाली अभी भी लोगों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है। बहुत समय बाद नीला आकाश और खुला आसमान देखने को मिला। दिल्ली में प्रदूषण के चलते नीला आसमान दिखाई नहीं देता। शिमला में गाड़ियां बहुत ज्यादा देखने को मिलीं, ये एक बदलाव देखने को मिला। 

सवाल- युवा लेखकों के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
जवाब-  मैं इस उम्र में ज्यादातर युवाओं से ही मिलना पसंद करता हूं। उनमें प्रतिभा का विस्फोट देख रहा हूं। मैं तीन-चार साल में देश के कई बड़े कला संस्थानों में घूमा। इसमें मुझे युवा लेखकों से कई कुछ चीजें सीखने को मिलीं। चाहे वह कला में हो, लेखन में हो, थियेटर या फिर सिनेमा। 

सवाल- कलाओं की तरफ आपका इतना रुझान क्यों?
जवाब-  दुनिया में जितने भी लोग हैं वे सुबह से रात तक नहाते-धोते हैं, कपड़े बदलते हैं। खाते हैं और सोते हैं। इसके आगे कलाएं हैं। वही मनुष्य के जीवन को अलग करती है। यह सीख मुझे युवा दिनों में मिली है। इसका मैंने भरपूर लाभ उठाया है। मुझे चित्रकारी करते हुए चार वर्ष हो चुके हैं और आज पहली बार शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में मेरी प्रदर्शनी लगी है। इसकी खुशी मैं बयां नहीं कर सकता।

सवाल-  शिमला से जुड़ी खास याद या किस्सा?
जवाब - शिमला से जुड़ी मेरी बहुत सी यादें हैं। एक बार शिमला आने के बाद मशोबरा के एक होटल में ठहरना हुआ। उस होटल के रास्ते में दोनों तरफ बड़े हरे पेड़ों की सुंदर कतारों का दृश्य अभी भी याद है। सोलन में मेरे साढ़ू का घर है। वहां पर हर वर्ष गर्मियों में अपने पूरे परिवार के साथ आता था। उस दौरान हर बार शिमला भी घूमने पहुंच जाया करता था।  छोटी बेटी वर्षिता विंग्टेश को यहां आना बहुत पसंद था। अब उसका देहांत हो चुका है। इसलिए इस बार शिमला आने पर उसकी बहुत याद आई।

सवाल- क्या आपने बाल साहित्य भी लिखा है ?
जवाब- बाल साहित्य और बच्चों की पत्रिका से मेरी शुरूआत हुई। मेरे बहुत से बाल साहित्य स्कूली बच्चों की एनसीआरटी की किताबों में भी हैं। इसमें धम्मक धम्मक आता हाथी, धम्मक धम्मक जाता हाथी और ऊंट चला, ऊंट चला को बच्चे पढ़ना पसंद करते हैं। 

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सवाल- कोरोना काल के बाद क्या साहित्य बदला ?
जवाब- हर घटना और दुर्घटना का लेखन पर प्रभाव हो़ता है। उस दौरान लंबे समय तक लोगों को एक-दूसरे से दूर रहना पड़ा। इसके चलते कई लोगों के संबंध टूट गए।
 इसके बाद लोगों के स्वभाव और कामकाज में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

सवाल- युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है ?
जवाब- युवाओं को मेरा यही संदेश है कि सभी कलाओं में रुचि रखो। जो भी काम कर रहे हो, उसे आनंद के साथ करो। तभी आप जीवन में सफल हो पाएंगे। इस समय हम छवियों की दुनिया में जी रहे हैं। आज से करीब 20 साल पहले ऐसी छवियां नहीं थीं। इसलिए अब ऐसी छवियां चुनें जो हमारे जीवन के लिए जरूरी हैं।

 

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