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जंगल की आग में झुलसे भालू के बच्चे को बना लिया परिवार का सदस्य

Thu, 19 Jul 2018 10:23 AM IST
सुभाष कुमार अग्निहोत्री, अमर उजाला, चंबा
सुभाष कुमार अग्निहोत्री, अमर उजाला, चंबा Updated Thu, 19 Jul 2018 10:23 AM IST
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Family saved a Baby Bear from forest fire and feed for two months

दो महीने पहले जंगल की आग में बुरी तरह झुलसे भालू के बच्चे की जान बचाकर रोशन लाल ने इसे अपने परिवार का सदस्य बना लिया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने बावजूद चंबा जिले के गरनोटा के पड़वाल निवासी रोशन लाल का परिवार इसे खरीदकर दूध पिला रहा है।

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भालू के बच्चे का नाम भोलू रखा गया है। भोलू भी परिवार के सदस्य की तरह रह रहा है। दो महीने पहले रोशन लाल अन्य ग्रामीणों के साथ गरनोटा के जंगल में लगी आग बुझाने गए थे। इस दौरान वे पानी वाली जगह पहुंचे तो देखा कि किसी जंगली जानवर का बच्चा बुरी तरह कराह रहा था।
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उन्होंने देखा कि जंगल की आग से भालू के बच्चे के पांव और सिर सहित शरीर झुलस गया था। वे इसे अपने साथ घर ले आए और इसका उपचार शुरू किया। इससे भालू का बच्चा धीरे-धीरे ठीक होने लगा। रोशन ने बताया कि परिवार के सदस्यों ने भालू के बच्चे का नाम भोलू रखा।
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इसका गुजारा पहले घर पर गाय के दूध से हो जाता था, लेकिन अब दूध न से इसके लिए खरीदकर दूध लाना पड़ रहा है। वे गरीब परिवार से हैं। खेतीबाड़ी से ही गुजारा चलता है। उनका घर दो जगह पड़वाल और धार में है। 

वन्य प्राणी संरक्षण केंद्र गोपालपुर भेजा भालू का बच्चा

Family saved a Baby Bear from forest fire and feed for two months
प्रतीकात्मक तस्वीर

रोशन लाल ने बताया कि वर्तमान में उनकी हालत काफी दयनीय है। बीमार होने के कारण उनकी बेटी दो माह तक मेडिकल कॉलेज टांडा में भर्ती रही। बेटी के इलाज पर काफी खर्चा हो चुका है।

उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार अपने दूसरे घर में जाना पड़ता है। ऐसे में यह चिंता रहती है कि पहले घर में भालू के बच्चे की देखभाल कौन करेगा। रोशन लाल ने कहा कि परिवार में उनकी पत्नी सीमा देवी, बड़ी बेटी रत्ना, छोटी बेटी सपना, बेटा अशोक कुमार और बादल हैं। 

वन रक्षक अशोक कुमार ने बताया कि रोशन लाल ने उन्हें फोन पर सूचित किया कि एक जंगल से भालू उनके घर में पहुंचा है। इसके बाद वन विभाग की टीम ने भालू के बच्चे को अपने कब्जे में लिया

तथा उसे वन परिक्षेत्र कार्यालय सिहुंता ले गए। उन्होंने कहा कि वन विभाग के पास इसे रखने का प्रावधान नहीं है। इसलिए भालू के बच्चे को वन्य प्राणी संरक्षण केंद्र गोपालपुर भेजा गया है।

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