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पहले पानी के सैंपल फेल, अब क्लोरीनेशन ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:59 AM IST
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पेयजल संकट से जूझने के बाद अब शहरवासियों को पीने लायक स्वच्छ पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। कई इलाकों में पानी के सैंपल फेल होने के बाद अब ज्यादा क्लोरीनेशन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। न्यू शिमला, विकासनगर, कंगनाधार और बीसीएस समेत शहर के कई क्षेत्रों में इन दिनों सफेद पानी की सप्लाई हो रही है।
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तय मात्रा से अधिक क्लोरीनेशन से किडनी और पेट संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है। लोगों का कहना है कि ज्यादा क्लोरीनेशन के चलते पानी का रंग ही बदल गया है। दो हफ्तों से शहर के आधा दर्जन से अधिक स्टोरेज टैंकों के सैंपल फेल हो चुके हैं। इनसे हजारों लोगों को पानी सप्लाई होता है।
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निगम ने सवाल उठने के बाद क्लोरीनेशन तो बढ़ा दी। लेकिन ज्यादा मात्रा और क्लोरीनेशन सही न होने से कई इलाकों में पानी का रंग ही बदल गया है। उधर निगम प्रशासन तय मानकों के अनुसार ही पानी की क्लोरीनेशन का दावा तो कर रहा है। लेकिन साथ ही सफेद पानी की सप्लाई होने पर करीब 20 मिनट उबालने की भी सलाह दे रहा है।
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निगम ऐसे करता है पानी की क्लोरीनेशन- नगर निगम पेयजल स्रोतों में पंपिंग से पहले क्लोरीनेशन की प्रक्रिया शुरू कर देता है। दो पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) यानि एक मिलीग्राम प्रति लीटर पानी के अनुसार क्लोरीनेशन होती है। पंपिंग के बाद शहर के बड़े स्टोरेज टैंकों में पहुंचने पर पानी में एक पीपीएम क्लोरीन बच जाता है।
इन टैंकों में फिर से एक पीपीएम क्लोरीनेशन करने के बाद इसे वितरण टैंकों को सप्लाई किया जाता है। उपभोक्ता तक यह मात्रा एक और आधा पीपीएम रहती है। यह सामान्य मानी जाती है। लेकिन यदि यह मात्रा एक से अधिक हो तो घातक साबित हो सकती है।
अस्थमा, फेफड़े और स्किन एलर्जी जैसी परेशानियों हो सकती हैं। आईजीएमसी के मेडिसीन विभाग के प्रो. राजीव रैना के अनुसार ज्यादा क्लोरीनेशन शरीर के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में फिल्टर या उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।
उबालकर ही पीयें पानी- ज्यादा क्लोरीनेशन पर पानी का रंग सफेद हो जाता है। ऐसे में लोग पानी उबालकर ही पीयें। पानी उबालने से इसमें क्लोरीन खत्म हो जाता है। इससे पानी फिर पीने लायक हो जाता है।
टैंक और बावड़ी के सैंपल फेल- शहर में पानी के कुछ और सैंपल फेल हो गए हैं। इनमें भराड़ी बावड़ी और समरहिल स्थित शिव मंदिर स्थित पानी की बावड़ी के सैंपल फेल हुए हैं। इसके अलावा संजौली में विजय कपरेट बिल्डिंग से लिए पानी के सैंपल भी सही नहीं पाए गए हैं। इसके लिए निगम के टैंक से ही पानी सप्लाई होता है। अश्वनी खड्ड स्थित ट्यूबवेल टू के सैंपल भी फेल हुए हैं।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील- मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि बरसात के मौसम में पानी उबालकर ही इस्तेमाल करें। प्राकृतिक स्रोतों का पानी पीने के लिए इस्तेमाल न करें। नगर निगम ने सैंपलिंग प्रक्रिया बढ़ा दी है। जहां सैंपल फेल हो रहे हैं, वहां लिखित चेतावनी देकर भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।