धर्मशाला उपचुनाव से पहले धूमल की सरकार को नसीहत, शांता का प्रचार से किनारा
भाजपा सरकार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने धर्मशाला उपचुनाव से पूर्व अपनी ही पार्टी के प्रति तल्ख तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। दो बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रेम कुमार धूमल ने माननीयों के यात्रा भत्ते बढ़ाने के फैसले पर अपनी ही सरकार पर नसीहत भरी टिप्पणी की है, वहीं पूर्व सीएम शांता कुमार ने कहा कि वह अपने 86वें जन्मदिन के बाद सक्रिय राजनीति छोड़ देंगे और उपचुनाव में ज्यादा समय नहीं देंगे।
मंत्रियों-विधायकों के यात्रा भत्ते बढ़ाने पर धूमल ने कहा कि जब विधायक स्वयं ही अपने वेतन-भत्ते तय करेंगे तो आलोचना स्वाभाविक है। खासकर ऐसे वक्त पर जब आर्थिक संकट से चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में भत्ते बढ़ाने से परहेज किया जाता तो बेहतर होता। धूमल ने कहा कि लोकराज लोकलाज से चलता है। पूर्व सीएम ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का अधिकार पे कमीशन को दिया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने तो संसद में प्रस्ताव भी पारित किया है कि वेतन आयोग ही उनके वेतन-भत्ते तय करेगा। धूमल ने कहा ‘मेरी जानकारी के अनुसार अगर कोई विदेश जाता है तो उसको बढ़ा हुआ यात्रा भत्ता मिलेगा, लेकिन लोगों में गलत धारणा आ गई है कि माननीयों ने वेतन, भत्ते, पेंशन और पता नहीं क्या-क्या बढ़ा लिया है। सरकार को जनभावनाओं से अवगत रहना चाहिए।’ गौरतलब है कि धूमल का नाम धर्मशाला उपचुनाव में बतौर प्रत्याशी उछल चुका है, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ने इसे सोशल मीडिया की उपज बताया था।
शांता कुमार ने ये कहा
उधर पूर्व सीएम शांता कुमार के दो पेज के एक ट्वीट ने उपचुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात के 10 घंटे बाद ही शांता ने ट्वीट किया कि अब वह 12 सितंबर को 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। चुनाव की राजनीति को वह अलविदा कह चुके हैं। अब सक्रिय राजनीति छोड़ दूंगा और विवेकानंद सेवा केंद्र को समय दूंगा।
इसके अलावा अपनी आत्मकथा को पूरा करने के लिए 13 सितंबर से चुपचाप एकांत में लिखने का काम करूंगा। इस दिन से लोगों से 12 से 1 बजे तक सिर्फ एक घंटा ही मिला करूंगा। इस ट्वीट से शांता ने साफ कर दिया है कि उपचुनाव में वह नाममात्र की भूमिका निभाएंगे। हालांकि राजनीतिक सूत्रों की मानें तो धर्मशाला उपचुनाव में भी शांता के पसंदीदा उम्मीदवार को लिस्ट में सबसे नीचे कर दिया है।
इससे पहले विधानसभा चुनाव में अपने शिष्य का टिकट कटने और लोकसभा चुनाव में कांगड़ा सीट से पसंदीदा प्रत्याशी को टिकट न मिलने से शांता पहले ही नाराज थे। हालांकि अमर उजाला से विशेष बातचीत में शांता ने कहा कि पार्टी के आदेशों के तहत धर्मशाला उपचुनाव में वह पूरी भूमिका निभाएंगे।