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डिग्री के साथ संस्कार और तकनीकी कौशल भी दें विश्वविद्यालय : राज्यपाल
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57वें स्थापना दिवस पर एचपीयू की उपलब्धियों की सराहना, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध और स्थानीय विकास को जोड़ने पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह के दूसरे सत्र में राज्यपाल एवं कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता ने विश्वविद्यालयों की भूमिका को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम युवा तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के एक हाथ में डिग्री और दूसरे हाथ में आधुनिक तकनीकी कौशल होना चाहिए, तभी वे बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्राकृतिक परिवेश, शैक्षणिक वातावरण और गौरवशाली इतिहास इसे देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में स्थान दिलाता है। स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। प्रथम कुलपति से लेकर आज तक शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत की है। उन्होंने कहा कि इसी विश्वविद्यालय ने हामिद करजई, जगत प्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और न्यायमूर्ति संजय करोल जैसी हस्तियां देश को दी हैं। बदलते समय, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि कुलपति प्रो. महावीर सिंह के नेतृत्व में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र भविष्य में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग, पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों, पहाड़ी संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का शोध समाज और स्थानीय समुदाय तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अडॉप्ट ए विलेज जैसी पहल अपनाने का भी आह्वान किया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समारोह में अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने प्रगति का एक वर्ष रिपोर्ट और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की। विश्वविद्यालय के न्यूजलेटर, शोध जर्नलों और विभिन्न पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक प्रो. एसएल कौशल, डीसीडीसी प्रो. हरि मोहन, डीन प्लानिंग प्रो. नैन जीत सिंह नेगी, सीडीओई निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार, वित्त अधिकारी डॉ. अमर दत्त शर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. आरएल जिंटा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और पूर्व छात्र मौजूद रहे।
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इन शिक्षकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों को मिला सम्मान
स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय ने श्रेष्ठ शिक्षक, श्रेष्ठ शोधकर्ता और श्रेष्ठ कर्मचारियों को सम्मानित किया। श्रेष्ठ शोधकर्ता के रूप में आचार्य वामिक आजमी को सम्मान मिला। गैर शिक्षण कर्मचारियों में सुनील वर्मा (सहायक कुलसचिव), जगदीश ठाकुर (अनुभाग अधिकारी), जेएस सोडी, ठुल्लू राम (जेओए-आईटी) और तारा दत्त (गेस्टेटनर ऑपरेटर) को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा पद्मश्री विद्यानंद सराईक, पद्मश्री नेक राम शर्मा और प्रो. राजीव चौहान को भी विश्वविद्यालय ने प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। सभी सम्मानित अतिथियों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा और समाज में उसकी भूमिका की सराहना की।
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सांस्कृतिक संध्या में दिखी हिमाचल की लोक विरासत
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रामानुजन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय गणित केंद्र तथा पहाड़ी संस्कृति एवं धरोहर केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक संध्या आयोजित हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. महावीर सिंह और स्वागताध्यक्ष प्रो. बीक शिवराम रहे। डॉ. विजय स्टोक्स ने पहाड़ी संस्कृति पर व्याख्यान दिया। विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने लोक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पद्मश्री विद्यानंद सराईक की विशेष प्रस्तुति और डॉ. मदन झल्ला के पहाड़ी लोक संगीत ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम के माध्यम से हिमाचल की लोक संस्कृति, परंपरा और विरासत को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह के दूसरे सत्र में राज्यपाल एवं कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता ने विश्वविद्यालयों की भूमिका को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम युवा तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के एक हाथ में डिग्री और दूसरे हाथ में आधुनिक तकनीकी कौशल होना चाहिए, तभी वे बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्राकृतिक परिवेश, शैक्षणिक वातावरण और गौरवशाली इतिहास इसे देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में स्थान दिलाता है। स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। प्रथम कुलपति से लेकर आज तक शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत की है। उन्होंने कहा कि इसी विश्वविद्यालय ने हामिद करजई, जगत प्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और न्यायमूर्ति संजय करोल जैसी हस्तियां देश को दी हैं। बदलते समय, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि कुलपति प्रो. महावीर सिंह के नेतृत्व में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र भविष्य में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग, पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों, पहाड़ी संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का शोध समाज और स्थानीय समुदाय तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अडॉप्ट ए विलेज जैसी पहल अपनाने का भी आह्वान किया।
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इन शिक्षकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों को मिला सम्मान
स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय ने श्रेष्ठ शिक्षक, श्रेष्ठ शोधकर्ता और श्रेष्ठ कर्मचारियों को सम्मानित किया। श्रेष्ठ शोधकर्ता के रूप में आचार्य वामिक आजमी को सम्मान मिला। गैर शिक्षण कर्मचारियों में सुनील वर्मा (सहायक कुलसचिव), जगदीश ठाकुर (अनुभाग अधिकारी), जेएस सोडी, ठुल्लू राम (जेओए-आईटी) और तारा दत्त (गेस्टेटनर ऑपरेटर) को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा पद्मश्री विद्यानंद सराईक, पद्मश्री नेक राम शर्मा और प्रो. राजीव चौहान को भी विश्वविद्यालय ने प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। सभी सम्मानित अतिथियों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा और समाज में उसकी भूमिका की सराहना की।
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सांस्कृतिक संध्या में दिखी हिमाचल की लोक विरासत
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रामानुजन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय गणित केंद्र तथा पहाड़ी संस्कृति एवं धरोहर केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक संध्या आयोजित हुई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. महावीर सिंह और स्वागताध्यक्ष प्रो. बीक शिवराम रहे। डॉ. विजय स्टोक्स ने पहाड़ी संस्कृति पर व्याख्यान दिया। विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने लोक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पद्मश्री विद्यानंद सराईक की विशेष प्रस्तुति और डॉ. मदन झल्ला के पहाड़ी लोक संगीत ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम के माध्यम से हिमाचल की लोक संस्कृति, परंपरा और विरासत को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।