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ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में गूंजेगा बीबीएमबी मामला, हिमाचल का एजेंडा तैयार

Sat, 30 Jun 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 30 Jun 2018 12:45 PM IST
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energy ministers meeting in shimla and BBMB Case

राजधानी शिमला के कुफरी में तीन जुलाई को होने वाली देश के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) का मामला उठेगा। बीबीएमबी के बिजली प्रोजेक्टों में पंजाब से अपना हिस्सा लेने के लिए हिमाचल केंद्र सरकार के समक्ष कई बार मामला उठा चुका है लेकिन पंजाब बकाया देने को तैयार नहीं है।

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ऐसे में अब तीन जुलाई को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में हिमाचल इस मामला को उठाएगा। बैठक के लिए हिमाचल सरकार ने अपना एजेंडा तैयार कर लिया है। 
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में चार जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में पंजाब के हिस्से की बिजली बेचने का फैसला लिया गया था। हिमाचल कैबिनेट ने दस साल के भीतर 13066 मिलियन यूनिट बिजली बेचकर अपना एरियर वसूलने का फैसला लिया था।
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2900 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने में असमर्थ पंजाब ने हिमाचल सरकार को ऑफर दिया था कि इस बकाया की वसूली अगर हिमाचल चाहे तो अगले 20 साल तक बीबीएमबी के प्रोजेक्टों में पंजाब के हिस्से की बिजली बेचकर कर सकता है।

हिमाचल सरकार ने पंजाब के इस आफर को मंजूर करते हुए 20 साल की जगह 10 साल में वसूली करने को मंजूरी दी थी। कैबिनेट के फैसले से हिमाचल सरकार ने पंजाब को अवगत करवाया था।

पहले तो पंजाब इस फैसले को मानने को तैयार हो गया था लेकिन अब इस बाबत आगामी कार्रवाई करने से पंजाब ने हाथ वापस खिंच लिए हैं। पंजाब की इस बेरुखी से हिमाचल सरकार की परेशानियां बढ़ गई है। ऐसे में सरकार इस मामले को ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में उठाने जा रही है। 

ट्रांसमिशन लाइन को मांगेंगे बजट- बैठक के लिए प्रदेश सरकार ने सात सूत्रीय एजेंडा तैयार किया है। सरकार बैठक के दौरान ट्रांसमिशन लाइनों के लिए केंद्र से अधिक बजट मांगेगी। जल विद्युत परियोजना को लेकर भी केंद्र से आर्थिक मदद मांगी जाएगी।


सौर ऊर्जा के उत्पादन की हिमाचल में कम संभावनाएं होने के चलते जयराम सरकार इसमें भी केंद्र से छूट मांगेगी। इसके अलावा गैर वन भूमि का मामला भी बैठक में उठाया जाएगा। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी परियोजना को स्थापित करने के लिए उतनी ही गैर वन भूमि होनी चाहिए।

इस भूमि को हरी पट्टी के तौर पर विकसित किया जाता है। लेकिन हिमाचल में गैर वन भूमि उपलब्ध नही है। ऐसे में केंद्र सरकार से इसको लेकर राहत मांगी जाएगी।

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