हिमाचल में 21 लाख उपभोक्ताओं को लग सकता है बिजली का झटका
हिमाचल के 21 लाख घरेलू उपभोक्ताओं और 30 हजार औद्योगिक घरानों को इस साल बिजली का झटका लग सकता है। राज्य बिजली बोर्ड ने साल 2020-21 के लिए बिजली की दरें बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। साल 2019 के 487 करोड़ के राजस्व अंतर का हवाला देते हुए बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर की है। इसमें बिजली बोर्ड ने खर्च बढ़ने और बीते साल नाममात्र दरें बढ़ने की दुहाई देते हुए आर्थिक स्थिति को खराब बताया है।
साल 2019 में बिजली की दरें पहली अप्रैल से लागू करने की जगह पहली जुलाई से लागू की गई थीं। साल 2018-19 का राजस्व अंतर सिर्फ 18 करोड़ होने से यह बदलाव किया था। आयोग ने 18 करोड़ के इस अंतर को पूरा करने के लिए बिजली की दरों में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। घरेलू उपभोक्ताओं को आयोग ने पांच पैसे प्रति यूनिट का लो वोल्टेज झटका दिया था।
औद्योगिक इकाइयों की बिजली भी पांच से दस पैसे प्रति यूनिट बढ़ाई थी। अब साल 2019-20 समाप्त होने तक और बीते सालों का राजस्व अंतर जुड़कर 487 करोड़ पहुंच गया है। बोर्ड को साल 2020-21 के लिए वार्षिक राजस्व आय के तहत छह हजार करोड़ की जरूरत है, जबकि वर्तमान बिजली दरों से बोर्ड को 5588 करोड़ प्राप्त होने का अनुमान है। ऐसे में यह अंतर 411 करोड़ हो गया है।
इसके अलावा साल 2017-18 का 76 करोड़ का अंतर अभी भी खड़ा है। ऐेसे में कुल 487 करोड़ का राजस्व अंतर हो गया है। ऐसे में आय के साधन कम होने और खर्च अधिक होने की बात बोर्ड ने नियामक आयोग से उठाई है। बोर्ड की याचिका पर आने वाले दिनों में नियामक आयोग स्थिति स्पष्ट करेगा। बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी कालटा ने आयोग के समक्ष पिटीशन दायर करने की पुष्टि की है।
साल 2016 में तीन फीसदी बढ़ी थीं बिजली दरें
साल 2016 में घरेलू बिजली की दरें साढ़े तीन फीसदी बढ़ी थीं। साल 2017-18 में चुनावी साल होने से दरों में इजाफा नहीं हुआ। साल 2018-19 में भी घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ीं। साल 2019-20 में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी की गई।
वर्तमान में यह हैं बिजली दरें
स्लैब बिजली दर
प्रति माह रुपये प्रति यूनिट
यूनिट में (2019-20)
0-60 1.0
0-125 1.55
126-300 2.95
301 से ऊपर 4.40