चुनावी मुद्दा, अब वरिष्ठता के लिए कोर्ट अंतिम ठिकाना
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बिना किसी वित्तीय लाभ के मांगी जा रही इस वरिष्ठता को देने में वर्तमान की मौजूदा कांग्रेस सरकार व पूर्व भाजपा सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। थक हार कर कर्मचारियों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है। कोर्ट से अनुबंध कर्मियों के पक्ष में आए वरिष्ठता लाभ के फैसलों को लेकर भी सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली गजब है।
सरकार सिर्फ कोर्ट में केस जीतकर आने वाले कर्मचारियों को ही वरिष्ठता लाभ दे रही है। बाकी ऐसे कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार के इस रवैये को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है। वहीं पूर्व भाजपा सरकार की अनुबंध नीति पर भी सवाल उठे हैं।
ठगा सा महसूस कर रहे कर्मचारी
प्रदेश के लगभग सभी विभागों में अनुबंध पर नियुक्तियां की गई हैं। भाजपा सरकार ने 8 वर्ष के बाद नियमित करने की नीति को बदल कर 6 वर्ष किया था। सरकार बदली और वर्तमान सरकार ने दो वर्ष बाद अनुबंध कर्मियों की मांग पर तीसरे बजट में अनुबंध कार्यकाल को 6 से 5 साल कर दिया। अनुबंध कर्मियों का असंतोष जारी रहने पर प्रदेश सरकार ने पंजाब की तर्ज पर 5 वर्ष का अनुबंध कार्यकाल कम कर 3 वर्ष कर दिया। सरकार के इस फैसले से अनुबंध कर्मियों के एक वर्ग को राहत मिली, लेकिन आठ, छह और पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी करने के बाद नियमित हुए कर्मियाें को कोई लाभ नहीं मिला। कर्मियों के दबाव में दोनों सरकारों ने अनुबंध कर्मियों के नियमितीकरण की अवधि घटाने के लिए एक के बाद एक कई फैसले लिए। नए बैच को तो तीन साल में नियमित होने की सुविधा मिल गई लेकिन पुराने बैच के आठ, छह और पांच वर्ष बाद नियमित किए गए मुलाजिम खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
कितने अनुबंध कर्मी नियमित हुए
छह से आठ वर्ष के अनुबंध कार्यकाल के बाद नियमित कर्मी - 10 हजार
पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी करने के बाद नियमित कर्मी - करीब 11 हजार
तीन वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी करने के बाद नियमित कर्मी - 5 हजार
ये सीनियर होकर भी जूनियर रह गए
सरकार ने अनुबंध कार्यकाल तीन वर्ष कर दिया लेकिन उनका क्या कसूर जो 8, 6 या 5 वर्ष पूरा करने के बाद नियमित हुए हैं। ऊपर से दो वर्ष का प्रोबेशन काल अलग से था।- राजेश जय सिंह पुरिया, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ
सरकार अनुबंध कर्मियों को बिना किसी वित्तीय लाभ के वरिष्ठता लाभ भी दे सकती है। इससे सरकार पर किसी भी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। हजारों कर्र्मी ही लाभान्वित होंगे। - राजेश वर्मा, पूर्व महासचिव हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ
अनुबंध कर्मियों को सरकार अगर नियमित करने में असमर्थ है तो केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर 2 साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले अनुबंध कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देकर आंशिक राहत दे। -संजीव ठाकुर, महासचिव पीटीए शिक्षक संघर्ष मंच
अनुबंध नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता लाभ न मिल पाने से ये हजारों कर्मचारी अपनी अनुबंध नियुक्ति के समय पर अपने से कनिष्ठ पदों पर तैनात कर्मचारियों से नियमित होने पर उनसे भी जूनियर होने को मजबूर हैं। -सुरेंद्र वर्मा, प्रेस सचिव अनुबंध नियमित अध्यापक संघ मोर्चा
वरिष्ठता लाभ से नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ
कई विभागों के कर्मचारियों ने अपने सेवा और वित्तीय लाभ के लिए कोर्ट का रुख किया है। ट्रिब्यूनल से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अनुबंध कर्मियों को वरिष्ठता लाभ देने के फैसले दे चुके हैं। कुछ फैसलों को सरकार ने मानकर अनुबंध के कुछ वर्ग को वरिष्ठता और अन्य लाभ दिए भी। लेकिन बहुत से मामले अभी भी या तो कोर्ट में चल रहे हैं या फिर सरकार उन पर कोई निर्णय नहीं कर पाई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सरकार अगर सभी अनुबंध कर्मियों को बिना किसी वित्तीय लाभ के वरिष्ठता लाभ दे देती है तो ज्यादातर कोर्ट केस अपने आप हल हो जाएंगे।
मामले पर क्या कहते है सता पक्ष और विपक्ष
प्रदेश सरकार ने कर्मचारी वर्ग का पूरा ध्यान रखा है। अनुबंध अवधि को तीन साल वर्तमान सरकार ने ही किया है। साल में दो बार अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया जा रहा है। कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों के मानदेय और वेतन में बढ़ोतरी की गई है। बेरोजगारों के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं। -नरेश चौहान, प्रवक्ता कांग्रेस
कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। सरकार ने कर्मचारियों को सिर्फ सब्जबाग दिखाए हैं। अब अपने अंतिम पड़ाव में सरकार कर्मियों को भ्रमित कर रही है। चोर दरवाजे से भर्तियां की जा रही हैं। कांग्रेस ने पढ़े लिखे युवाओं की अनदेखी की है। सरकार की नीयत और नीति दोनों में खोट है। -गणेश दत्त, उपाध्यक्ष भाजपा
प्रदेश में 15 हजार आउटसोर्स कर्मचारी
प्रदेश के विभिन्न विभागों में आउट सोर्सिंग पर नियुक्त करीब 15 हजार कर्मचारी बीते लंबे समय से सरकार से अनुबंध पर लाने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के पास जब कर्मचारियों की कमी थी तो उस दौरान कंपनियों के माध्यम से विभिन्न विभागों और निगम-बोर्डों में इन कर्मियों को नियुक्तियां दी गई थी। अब यह कर्मचारी अनुबंध पर लेने की मांग कर रहे हैं।