विस चुनाव: शादी में किया प्रचार तो नेताजी के खाते में जुड़ेगा ये सारा खर्च
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हिमाचल विधानसभा चुनाव की तारीख के एलान से पहले ही निर्वाचन आयोग ने प्रचार को लेकर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रत्याशियों के गलत तरीके से प्रचार करने और मनमानी रोकने के लिए चुनाव अधिकारियों को पहले ही सचेत कर दिया है।
चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले गलत हथकंडे अपनाने वाले उम्मीदवारों पर भी नकेल कसने की तैयारी चल रही है।
एसडीएम रामपुर निपुण जिंदल की अध्यक्षता में हुई अधिकारियों की अहम बैठक में अवगत कराया गया कि इस बार विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी शादी में प्रचार करता हुआ पकड़ा जाता है तो विवाह का पूरा खर्च उसके चुनाव खर्चे में जोड़ दिया जाएगा।
इस संबंध में निर्वाचन आयोग ने साफ शब्दों में निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अगर कोई प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान जागरण और अन्य कार्यक्रमों में जाकर अपना प्रचार करता है तो इसका खर्चा भी प्रत्याशी के चुनाव खर्च में शामिल कर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं होंगे तबादले
भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के अन्य सदस्यों के हिमाचल दौरे के बाद प्रदेश में तबादलों पर अघोषित प्रतिबंध लग गया है। अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना प्रदेश में एक भी तबादला नहीं हो सकेगा। आयोग की ओर से पिछले एक महीने में हुए तबादलों की जानकारी मांगने के बाद शासन स्तर पर तबादलों पर अघोषित रोक लगा दी गई है।
सूत्रों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता से पहले सरकार अपनी सुविधा के हिसाब से कुछ प्रशासनिक और पुलिस अफसरों को तैनाती देना चाहती थी। पिछले एक महीने में सरकार ने तबादलों की बाढ़ सी ला दी। तकरीबन एक महीने के दौरान सरकार ने कई डीसी और एसपी के अलावा दो दर्जन से ज्यादा एचएएस और एचपीएस अधिकारियों को इधर से उधर कर दिया।
इनमें कई ऐसे थे, जिन्हें एक तैनाती स्थल पर तीन साल से ज्यादा का समय पूरा हुए काफी समय हो गया था। आयोग ने अब प्रदेश की हर तैनाती और तैनात अफसर पर नजर गड़ा दी है।
सूत्र बताते हैं कि आचार संहिता लागू होने के बाद शासन स्तर पर कई अहम पदों पर बदलाव हो सकता है। इसके अलावा पुलिस के भी कई बड़े पदों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सूबे में अब जो भी बड़ा बदलाव होगा, उसे आयोग की जानकारी के बाद ही लागू किया जा सकेगा।