आठ महिलाओं के दल ने फतह की 21630 फीट ऊंची मानीरंग चोटी
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पच्चीस साल पहले एवरेस्ट फतह कर चुकीं भारतीय महिलाओं के आठ सदस्यीय दल ने लाहौल-स्पीति की मानीरंग चोटी को फतह कर सिल्वर जुबली मनाई। महिलाएं वापस मनाली लौट आई हैं। मनाली की दीपू शर्मा, डिक्की डोलमा और राधा देवी इस दल में शामिल रहीं।
इन्होंने वर्ष 1993 में एवरेस्ट को फतह किया था। इसकी 25वीं वर्षगांठ मनाने के लिए उन्होंने 21630 फुट ऊंची मानीरंग चोटी को फतह करने का निर्णय लिया था। दल में शामिल सभी महिलाएं 40 वर्ष से अधिक आयु की हैं।
इनमें 10 नौजवान युवतियां भी शामिल रहीं। इनके साथ 1993 में एवरेस्ट विजेता एवं अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण खेल संस्थान के उपनिदेशक रह चुके राजीव शर्मा भी तकनीकी सलाहकार के तौर पर शामिल हुए।
ये महिलाएं शामिल रहीं दल में
दल में कुल 19 सदस्यों ने भाग लिया। अभियान दल मनाली से 10 अगस्त को रवाना हुआ था। दल को केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने दिल्ली में 7 अगस्त को हरी झंडी दिखाई थी।
अभियान का नेतृत्व विमला नेगी ने किया। उन्होंने बताया कि सदस्य 25वीं वर्षगांठ मना रही हैं। अपना अनुभव इस अभियान की नई पर्वतारोहियों को बताया। अभियान करीब 4 सप्ताह तक चला। आईएमएफ के अभियान का संचालन ट्रैक इंडिया आउट टुअर मनाली की ओर से किया गया।
अभियान में दीपू शर्मा, रीटा मारवाह, अनिता देवी, चाउला जागीरदार, सविता धापवाल, राधा देवी और डिक्की डोलमा ने भाग लिया। दीपू शर्मा, अनुजा ने कहा कि 1993 के एवरेस्ट अभियान में कई नए रिकार्ड बने हैं।
इसमें एवरेस्ट को सबसे ज्यादा 18 लोगों ने फतह किया था। इसमें छह महिलाएं थीं। मनाली की 19 वर्षीय डिक्की डोलमा सबसे कम आयु में एवरेस्ट फतह करने वाली थीं। ऐसे में यह अभियान उनके लिए बेहद खास रहा है।