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एसआईटी का खर्च चुकाएंगे नियम पूरा नहीं करने वाले शिक्षण संस्थान

Fri, 18 May 2018 02:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Fri, 18 May 2018 02:18 PM IST
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Educational institutes to bear the expense of supreme court SIT

हिमाचल प्रदेश के 159 निजी शिक्षण संस्थानों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद अब सुप्रीमकोर्ट की ओर से जांच के लिए गठित एसआईटी का खर्च करीब सवा करोड़ भी वसूला जाएगा। शिक्षा विभाग ने एसआईटी के आने-जाने, रहने और खाने-पीने का पूरा पैसा संस्थानों से लेने का फैसला लिया है। शिक्षा सचिव के आदेशानुसार विभागीय अधिकारी प्रति संस्थान खर्च का ब्योरा तैयार करने में जुटे हैं। एक सप्ताह के भीतर सभी संस्थानों को नोटिस जारी होगा।

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सुप्रीमकोर्ट की ओर से निजी शिक्षण संस्थानों की कमियां तलाशने को गठित एसआईटी ने बीते माह हाईकोर्ट में सातवीं स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इसमें प्रदेश में स्थित 35 निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों को बंद करने, 24 संस्थानों पर आपराधिक मामला दर्ज करने और 18 अन्य संस्थानों को कमियां दूर करने का मौका देते हुए उनके खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
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कुल 159 संस्थानों में एसआईटी ने कमियां निकाली हैं। हाईकोर्ट ने प्रदेश के कुछ शिक्षण संस्थानों की ओर से जाली सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़ी खबरों पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की विस्तृत जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने मानव संसाधनों की कमी का हवाला लेते हुए एसआइटी गठन की मांग की थी।
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सुप्रीमकोर्ट ने एसआईटी का गठन करते हुए इसका अध्यक्ष बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एसी वर्मा को बनाया, जबकि सीबीआई के रिटायर्ड उच्च अधिकारी एके मल्होत्रा, पीसी शर्मा व विजय कुमार को सदस्य बनाया। बीते दो साल में एसआईटी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित निजी शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया।

इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार का सवा दो करोड़ रुपये खर्च आया है। रिपोर्ट में संस्थानों की कमियां पाए जाने पर शिक्षा विभाग ने निरीक्षण का पूरा खर्च संबंधित संस्थानों से वसूलने का फैसला लिया है। इस मामले पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।


हाईकोर्ट ने आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन को एसआइटी की ओर से दी गई रिपोर्टों में बताई गईं शिक्षण संस्थानों की खामियों को देखने और अपनी सिफारिशों से कोर्ट को अवगत कराने के आदेश दिए हैं। राजस्व सचिव को तकनीकी संस्थानों द्वारा धारा 118 के तहत खरीदी गई जमीन से जुड़ी अनुमतियों का ब्योरा सौंपने को भी कहा है।

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