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शिमला: फर्जी संस्थान चलाने वाले दो और निदेशकों पर कसेगा ईडी का शिकंजा
Tue, 08 Jun 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 08 Jun 2021 05:00 AM IST
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सांकेतिक
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250 करोड़ रुपये के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में नाइलेट के नाम पर फर्जी संस्थान चलाने वाले दो निदेशकों पर भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसेगा। सीबीआई ने मामले की जांच पूरी होने के बाद दोनों के खिलाफ जांच की सिफारिश करते हुए संपत्ति से संबंधित दस्तावेज ईडी को सौंप दिए हैं। आरोप सिद्ध हुए तो इनकी संपत्ति नीलाम हो सकती है। घोटाले के आरोपी अरविंद राज्टा की निदेशक पत्नी के खिलाफ पहले ही ईडी जांच कर रहा है। अब दो अन्य निदेशकों की संपत्ति की जांच भी की जाएगी।
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सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला है कि दोनों निदेशकों ने प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को फर्जी तरीके से हासिल कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। नाइलेट के नाम पर प्रदेश में नौ फर्जी संस्थान चल रहे थे। इन्होंने विभिन्न कोर्स करवाने की मान्यता के बिना ही वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच छात्रवृत्ति के 29.80 करोड़ रुपये हासिल किए। करीब 8894 फर्जी छात्रवृत्तियां दर्शाकर यह रकम ऐंठी गई। जांच में पता चला है कि शिक्षा निदेशालय के कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही से करोड़ों की रकम एक ऐसे संस्थान को जारी कर दी गई, जिसने कभी छात्रों को कोई कोर्स करवाया ही नहीं और न ही वह इसके लिए पात्र था।
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ऐसे दिया घोटाले को अंजाम
घोटाले को अंजाम देने के लिए छात्रों को काउंसलिंग के नाम पर बुलाया जाता था और इसके बाद उनसे दस्तावेज लेकर बैंकों में उनके खाते खोले गए। यहां बैंक अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों की छात्रवृत्ति को (एएसए मार्केटिंग सॉल्यूशन) के नाम से चल रहे खाते में फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की रकम को ट्रांसफर करवाया गया। मामले में कई बैंकों के प्रबंधकों को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में चार्जशीट दायर करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों, बैंक अफसरों और फर्जी संस्थान चलाने वाले तीन निदेशकों को आरोपी बनाया है। जांच में पता चला है कि एससी श्रेणी के छात्रों को भी एसटी का दर्शाकर बड़ा गोलमाल किया गया। जब इस मामले में संबंधित छात्रों से पूछताछ की गई तो इस मामले का खुलासा हुआ।
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