{"_id":"692710ff18d3c8f5c90abac1","slug":"ec-court-candidates-seek-staff-support-shimla-news-c-19-sml1002-638040-2025-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: ईसी, कोर्ट पद के उम्मीदवारों \nने कर्मियों से मांगा समर्थन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: ईसी, कोर्ट पद के उम्मीदवारों ने कर्मियों से मांगा समर्थन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घोषणापत्र में कर्मचारियों की मांगों दी प्राथमिकता
दोनों पदों के लिए 28 नवंबर को होगा विवि में मतदान
संवाद न्यूल एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में गैर शिक्षक कर्मचारियों की कोर्ट और कार्यकारी परिषद (ईसी) सदस्यों के चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है।
तीनों प्रमुख खेमों भाजपा समर्थित, कांग्रेस समर्थित और माकपा समर्थित सदस्यों ने अपना घोषणापत्र जारी कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। मतदान 28 नवंबर को होगा। घोषणा पत्र में कर्मचारियों की मांगों को प्राथमिकता दी है। कांग्रेस समर्थित खेमे का घोषणापत्र पिछले कार्यकाल की सफलताओं पर आधारित रहा। इसमें वेतन विसंगतियों के समाधान, पदोन्नति मामलों में तेजी, कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार और प्रशासनिक स्थिरता जैसे बिंदुओं को प्रमुखता दी गई। कोर्ट सीट के दावेदार राजेश ठाकुर और कार्यकारी परिषद के उम्मीदवार प्रेम प्रकाश नेगी का कहना है कि कर्मचारियों की जरूरतों को प्राथमिकता देने का प्रयास जारी रहा। भाजपा समर्थित पैनल ने विश्वविद्यालय में ढांचागत और तकनीकी सुधार को मुख्य मुद्दा बनाया है। सूचना प्रणाली को आधुनिक बनाने, फाइल प्रक्रिया को तेज और डिजिटल करने तथा शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी करने का भरोसा दिया है। कोर्ट उम्मीदवार बुद्धि राम और इसी दावेदार सुरेश कुमार ने कहा कि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर कर्मचारियों का कार्य माहौल बेहतर बनाया जा सकता है। माकपा समर्थित दल ने विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की आवाज कमजोर पड़ने का आरोप लगाया और संघर्ष-प्रधान रुख अपनाया। मनुज कुमार और मोहन लाल ने कहा कि बिना संघर्ष कर्मचारियों के हितों की रक्षा संभव नहीं है। 28 नवंबर को गैर शिक्षक कर्मचारी यह तय करेंगे कि विश्वविद्यालय का अगला नेतृत्व सुधार, उपलब्धियों या संघर्ष में से किस दिशा को आगे बढ़ाएगा।
विज्ञापन
दोनों पदों के लिए 28 नवंबर को होगा विवि में मतदान
संवाद न्यूल एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में गैर शिक्षक कर्मचारियों की कोर्ट और कार्यकारी परिषद (ईसी) सदस्यों के चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है।
तीनों प्रमुख खेमों भाजपा समर्थित, कांग्रेस समर्थित और माकपा समर्थित सदस्यों ने अपना घोषणापत्र जारी कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। मतदान 28 नवंबर को होगा। घोषणा पत्र में कर्मचारियों की मांगों को प्राथमिकता दी है। कांग्रेस समर्थित खेमे का घोषणापत्र पिछले कार्यकाल की सफलताओं पर आधारित रहा। इसमें वेतन विसंगतियों के समाधान, पदोन्नति मामलों में तेजी, कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार और प्रशासनिक स्थिरता जैसे बिंदुओं को प्रमुखता दी गई। कोर्ट सीट के दावेदार राजेश ठाकुर और कार्यकारी परिषद के उम्मीदवार प्रेम प्रकाश नेगी का कहना है कि कर्मचारियों की जरूरतों को प्राथमिकता देने का प्रयास जारी रहा। भाजपा समर्थित पैनल ने विश्वविद्यालय में ढांचागत और तकनीकी सुधार को मुख्य मुद्दा बनाया है। सूचना प्रणाली को आधुनिक बनाने, फाइल प्रक्रिया को तेज और डिजिटल करने तथा शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी करने का भरोसा दिया है। कोर्ट उम्मीदवार बुद्धि राम और इसी दावेदार सुरेश कुमार ने कहा कि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर कर्मचारियों का कार्य माहौल बेहतर बनाया जा सकता है। माकपा समर्थित दल ने विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की आवाज कमजोर पड़ने का आरोप लगाया और संघर्ष-प्रधान रुख अपनाया। मनुज कुमार और मोहन लाल ने कहा कि बिना संघर्ष कर्मचारियों के हितों की रक्षा संभव नहीं है। 28 नवंबर को गैर शिक्षक कर्मचारी यह तय करेंगे कि विश्वविद्यालय का अगला नेतृत्व सुधार, उपलब्धियों या संघर्ष में से किस दिशा को आगे बढ़ाएगा।
विज्ञापन