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Shimla News: एचपीयू में स्थापित होगा डीआरडीओ–इनमास का शोध केंद्र

Mon, 29 Dec 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Dec 2025 11:59 PM IST
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DRDO-INMAS research centre to be set up in HPU
एक्सकलूसिव
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हिमाचल विवि के आठ विभागों के पीएचडी विद्यार्थियों को मिलेगा डीआरडीओ वैज्ञानिकों का संयुक्त शोध मार्गदर्शन

इनमास के आठ वैज्ञानिकों को बनाया गया है मार्गदर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में रक्षा अनुसंधान संगठन के इंडियन न्यूक्लियर मेडिसिन एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान इनमास (इनमास) का शोध केंद्र स्थापित होगा। यह निर्णय विश्वविद्यालय और इनमास के बीच हुए समझौते के तहत लिया है।

प्रस्तावित शोध केंद्र के माध्यम से विश्वविद्यालय में रक्षा, परमाणु विज्ञान और विकिरण सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान को एक संगठित ढांचा मिलेगा। केंद्र का उद्देश्य विभिन्न विभागों में चल रहे अनुसंधान कार्यों को एक मंच पर लाना और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के साथ नियमित शैक्षणिक समन्वय स्थापित करना है। इस केंद्र के तहत विश्वविद्यालय के आठ विभागों के पीएचडी शोधार्थियों को डीआरडीओ–आईएनएमएएस के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से संयुक्त शोध मार्गदर्शन मिलेगा। इनमें केमिस्ट्री, बायोसाइंस, कृषि प्रौद्योगिकी, भौतिकी, विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी संस्थान, रक्षा अनुसंधान और फोरेंसिक साइंस विभाग प्रस्तावित हैं। 5 दिसंबर को एचपीयू की अकादमिक परिषद की बैठक में इनमास के आठ वरिष्ठ वैज्ञानिकों को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीएचडी शोधार्थियों के संयुक्त शोध मार्गदर्शक के रूप में मान्यता दी थी। इस स्वीकृति के आधार पर विश्वविद्यालय परिसर में एक केंद्रीय शोध केंद्र स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। केंद्र से शोधार्थियों को दिशा-निर्देश, तकनीकी सहयोग और विषय विशेषज्ञता एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी।
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आधुनिक उपकरणों से प्रशिक्षण : कुलपति
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि पीएचडी शोधार्थी अपने शोध कार्य का एक बड़ा हिस्सा आईएनएमएएस की उन्नत प्रयोगशालाओं में भी कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों, सुरक्षा मानकों और व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। विवि का मानना है कि संयुक्त मार्गदर्शन व्यवस्था से शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा और अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप दिशा मिलेगी। प्रस्तावित शोध केंद्र विश्वविद्यालय और डीआरडीओ के बीच समन्वय का मुख्य बिंदु होगा। इसके माध्यम से शोध परियोजनाओं की निगरानी, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वैज्ञानिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
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