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Shimla News: विवि के डॉ. तरुण विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में हुए शामिल
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स्टैनफोर्ड विवि, एल्सेवियर ने जारी की सूची
सिलिकॉन फोटोनिक्स, नैनोफोटोनिक्स के क्षेत्र में किया है शोध
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) के सहायक आचार्य डॉ. तरुण शर्मा को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से जारी सूची में उनका चयन सिलिकॉन फोटोनिक्स, नैनोफोटोनिक्स और कृत्रिम मेधा आधारित प्रकाशीय संगणना के क्षेत्र में उनके शोध योगदान के लिए हुआ है। डॉ. शर्मा यूआईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग में कार्यरत हैं। वह विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एआई ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम्स के उपनिदेशक भी हैं।डॉ. शर्मा का शोध चिप आधारित संवेदन तकनीक और प्रकाशीय उपकरणों के विकास पर केंद्रित है। सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक में प्रकाश की मदद से सूचना के प्रसंस्करण और संचार को अधिक तेज तथा ऊर्जा दक्ष बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग कृत्रिम मेधा आधारित प्रणालियों और भविष्य की उन्नत संगणना तकनीकों में किया जा सकता है। यूआईटी के निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह, कुलपति प्रो. महावीर सिंह और केंद्र के निदेशक प्रो. प्रदीप सहित संस्थान के शिक्षकों ने डॉ. शर्मा को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
देश-विदेश के संस्थानों के साथ शोध सहयोग
डॉ. शर्मा दक्षिण कोरिया के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चीन के शेनझेन और तियानजिन विश्वविद्यालयों, जापान के ओसाका मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय तथा भारत के आईआईटी रुड़की और भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरू सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ शोध सहयोग कर रहे हैं। उनके शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. शर्मा से जुड़े सेंटर फॉर एआई ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम्स को भविष्य की रक्षा तकनीकों पर शोध के लिए भारतीय सेना से 10 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष लगभग 12 करोड़ रुपये की एक अन्य शोध परियोजना का प्रस्ताव विचाराधीन है।
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सिलिकॉन फोटोनिक्स, नैनोफोटोनिक्स के क्षेत्र में किया है शोध
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) के सहायक आचार्य डॉ. तरुण शर्मा को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से जारी सूची में उनका चयन सिलिकॉन फोटोनिक्स, नैनोफोटोनिक्स और कृत्रिम मेधा आधारित प्रकाशीय संगणना के क्षेत्र में उनके शोध योगदान के लिए हुआ है। डॉ. शर्मा यूआईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग में कार्यरत हैं। वह विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एआई ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम्स के उपनिदेशक भी हैं।डॉ. शर्मा का शोध चिप आधारित संवेदन तकनीक और प्रकाशीय उपकरणों के विकास पर केंद्रित है। सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक में प्रकाश की मदद से सूचना के प्रसंस्करण और संचार को अधिक तेज तथा ऊर्जा दक्ष बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग कृत्रिम मेधा आधारित प्रणालियों और भविष्य की उन्नत संगणना तकनीकों में किया जा सकता है। यूआईटी के निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह, कुलपति प्रो. महावीर सिंह और केंद्र के निदेशक प्रो. प्रदीप सहित संस्थान के शिक्षकों ने डॉ. शर्मा को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
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देश-विदेश के संस्थानों के साथ शोध सहयोग
डॉ. शर्मा दक्षिण कोरिया के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चीन के शेनझेन और तियानजिन विश्वविद्यालयों, जापान के ओसाका मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय तथा भारत के आईआईटी रुड़की और भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरू सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ शोध सहयोग कर रहे हैं। उनके शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. शर्मा से जुड़े सेंटर फॉर एआई ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम्स को भविष्य की रक्षा तकनीकों पर शोध के लिए भारतीय सेना से 10 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष लगभग 12 करोड़ रुपये की एक अन्य शोध परियोजना का प्रस्ताव विचाराधीन है।
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