सौहार्द की मिसाल: नाहन में मुस्लिम परिवार बना रहा रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले
दशहरे पर जलाए जाने वाले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले उत्तर प्रदेश के शामली से आने वाला मुस्लिम परिवार तैयार करता है।
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ऐतिहासिक नाहन शहर का दशहरा उत्सव गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करता है। यहां दशहरे पर जलाए जाने वाले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले उत्तर प्रदेश के शामली से आने वाला मुस्लिम परिवार तैयार करता है। वर्षों से चली आ रही परंपरा साझा संस्कृति और सौहार्द की मिसाल है। शामली जिले के थाना कस्बे के निवासी मोहम्मद सद्दाम और सलीम अहमद का परिवार दशहरे से नौ-दस दिन पहले नाहन पहुंच जाता है। परिवार के नौ से दस सदस्य दिन-रात मेहनत कर तीनों पुतलों को आकार देते हैं। इस बार भी कारीगर देर रात तक काम कर पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पुतले बनाना इस परिवार का पुश्तैनी पेशा है। यह काम उनके लिए रोजी-रोटी का जरिया होने के साथ दशहरे के आयोजन से जुड़ने का माध्यम भी है। कारीगर पुतलों को आकर्षक बनाने के लिए मेहनत करते हैं। दशहरे के दिन जब पुतलों का दहन होता है, तो उन्हें भी अपनी मेहनत सफल होने की खुशी मिलती है।
700 से अधिक आतिशबाजियों से जगमगाएंगे पुतले
तीनों पुतलों में आतिशबाजी लगाने का काम भी यही परिवार कर रहा है। इस बार पुतलों में 700 से अधिक पटाखे लगाने का लक्ष्य है। परिवार के सभी सदस्य निर्माण में जुटे हैं, ताकि दशहरे के दिन तक तैयारियां पूरी हो सकें। पुतलों के दहन के दौरान होने वाली आतिशबाजी आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी।
चौगान मैदान में 40 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन
वर्ष 1621 में बसे ऐतिहासिक नाहन शहर के चौगान मैदान में दशहरा मनाया जाएगा। यहां 40 फीट ऊंचे रावण, 35 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 30 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का दहन होगा। आतिशबाजी और सतरंगी रोशनी के बीच होने वाला यह आयोजन शहरवासियों के लिए खास आकर्षण रहेगा।
त्योहार अलग, खुशियां साझा
नगर परिषद नाहन के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार के अनुसार, पुतलों के निर्माण पर करीब 1.50 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आतिशबाजी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग बजट है। पूरे आयोजन पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। नाहन का दशहरा इस बात की मिसाल है कि त्योहारों की खुशियां किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होतीं। रावण के पुतले बनाने वाले मुस्लिम कारीगरों की भागीदारी साझा संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को मजबूती देती है। चौगान मैदान में जब तीनों पुतलों का दहन होगा, तो उसमें इन कारीगरों की मेहनत भी शामिल होगी। पुतले भले ही कुछ पलों में राख हो जाएं, लेकिन उनके निर्माण से जुड़े भाईचारे का संदेश लोगों के बीच बना रहेगा।