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Shimla News: सेब तुड़ान के बाद बगीचा न छोड़ें खाली, करें अगले साल की तैयारी
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बागवानी विभाग ने जिले के बागवानों को दी सलाह, सेब तुड़ान के बाद बगीचे का प्रबंधन करना जरूरी
नोडल अधिकारी ने दी रोग और पोषण संबंधी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में बागवानी विभाग ने बागवानों को सेब तुड़ान के बाद बगीचों को खाली न छोड़ने की सलाह दी है। विभाग ने उन निचले क्षेत्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जहां सेब तुड़ान का काम पूरा हो गया है या जल्द पूरा होने वाला है।
विभाग के विशेषज्ञों ने बागवानों को अभी से अगले साल की फसल की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार सेब तुड़ान के बाद बगीचे का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। विभाग के नोडल अधिकारी भूपिंदर सिंह नेगी ने सलाह दी है कि तुड़ान के बाद रोग प्रबंधन, संतुलित पोषण और पत्तियों की देखभाल पर तुरंत ध्यान दें। उन्होंने बताया कि तुड़ान के दौरान पौधों पर बने घावों से कैंकर और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे अगली फसल प्रभावित हो सकती है। नेगी ने कहा कि कैंकर की रोकथाम और घावों की सुरक्षा के लिए काक्यूप्रोफिक्स डिस्प्रेस नामक फफूंदनाशी का प्रयोग किया जा सकता है। यह कॉपर आधारित घटक रोग संक्रमण से बचाने में मदद करता है।
वहीं जिन बगीचों में मार्सोनिना और अल्टरनेरिया का प्रकोप रहा है, वहां विभागीय सलाह के अनुसार स्वीकृत फफूंदनाशियों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि रोग प्रबंधन केवल छिड़काव तक सीमित नहीं है। पतझड़ के बाद संक्रमित पत्तियों को एकत्र कर नष्ट करना भी जरूरी है। बगीचे की स्वच्छता अगले मौसम में रोग के प्राथमिक संक्रमण को रोकने में मदद करती है। तुड़ान के बाद पौधों की पोषण संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। पोषण प्रबंधन मिट्टी और पत्ती परीक्षण के परिणाम, पौधे की उम्र और पिछले सीजन की वृद्धि के आधार पर किया जाना चाहिए। नेगी ने कहा कि पौधों के लिए संतुलित पोषण बेहद जरूरी है और इसका निर्धारण मिट्टी और पत्ती परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिए।
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अनावश्यक नाइट्रोजन के प्रयोग से बचें
विभाग के नोडल अधिकारी भूपिंदर सिंह नेगी ने बागवानों को अनावश्यक नाइट्रोजन के प्रयोग से बचने की सलाह दी। सामान्य पौधों में लगभग 150 ग्राम यूरिया या 300 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट प्रति पौधा दिया जा सकता है। सघन बागवानी वाले पौधों में यह मात्रा लगभग 30 ग्राम यूरिया या 100 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट हो सकती है। मौसम के अंत में जब 15 से 25 फीसदी पत्तियां शेष हों, तब जिंक और बोरोन जैसे कली निर्माण पोषक तत्वों का प्रयोग मजबूत फल-कलियों के विकास में सहायक हो सकता है।
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नोडल अधिकारी ने दी रोग और पोषण संबंधी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में बागवानी विभाग ने बागवानों को सेब तुड़ान के बाद बगीचों को खाली न छोड़ने की सलाह दी है। विभाग ने उन निचले क्षेत्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जहां सेब तुड़ान का काम पूरा हो गया है या जल्द पूरा होने वाला है।
विभाग के विशेषज्ञों ने बागवानों को अभी से अगले साल की फसल की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार सेब तुड़ान के बाद बगीचे का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। विभाग के नोडल अधिकारी भूपिंदर सिंह नेगी ने सलाह दी है कि तुड़ान के बाद रोग प्रबंधन, संतुलित पोषण और पत्तियों की देखभाल पर तुरंत ध्यान दें। उन्होंने बताया कि तुड़ान के दौरान पौधों पर बने घावों से कैंकर और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे अगली फसल प्रभावित हो सकती है। नेगी ने कहा कि कैंकर की रोकथाम और घावों की सुरक्षा के लिए काक्यूप्रोफिक्स डिस्प्रेस नामक फफूंदनाशी का प्रयोग किया जा सकता है। यह कॉपर आधारित घटक रोग संक्रमण से बचाने में मदद करता है।
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वहीं जिन बगीचों में मार्सोनिना और अल्टरनेरिया का प्रकोप रहा है, वहां विभागीय सलाह के अनुसार स्वीकृत फफूंदनाशियों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि रोग प्रबंधन केवल छिड़काव तक सीमित नहीं है। पतझड़ के बाद संक्रमित पत्तियों को एकत्र कर नष्ट करना भी जरूरी है। बगीचे की स्वच्छता अगले मौसम में रोग के प्राथमिक संक्रमण को रोकने में मदद करती है। तुड़ान के बाद पौधों की पोषण संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। पोषण प्रबंधन मिट्टी और पत्ती परीक्षण के परिणाम, पौधे की उम्र और पिछले सीजन की वृद्धि के आधार पर किया जाना चाहिए। नेगी ने कहा कि पौधों के लिए संतुलित पोषण बेहद जरूरी है और इसका निर्धारण मिट्टी और पत्ती परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिए।
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अनावश्यक नाइट्रोजन के प्रयोग से बचें
विभाग के नोडल अधिकारी भूपिंदर सिंह नेगी ने बागवानों को अनावश्यक नाइट्रोजन के प्रयोग से बचने की सलाह दी। सामान्य पौधों में लगभग 150 ग्राम यूरिया या 300 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट प्रति पौधा दिया जा सकता है। सघन बागवानी वाले पौधों में यह मात्रा लगभग 30 ग्राम यूरिया या 100 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट हो सकती है। मौसम के अंत में जब 15 से 25 फीसदी पत्तियां शेष हों, तब जिंक और बोरोन जैसे कली निर्माण पोषक तत्वों का प्रयोग मजबूत फल-कलियों के विकास में सहायक हो सकता है।