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Shimla News: कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ा,तीन माह में 739 लोगों को काटा
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आईजीएमसी में उपचार करवाने पहुंचे लोगों के आंकड़ों से खुलासा, 107 को बिल्लियों ने भी काटा
कुत्तों ने 351 और बंदरों ने 259 लोगों को काटा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में कुत्तों और बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में जुलाई से सितंबर तक 739 मामले जानवरों के काटने के आए हैं। इनमें कुत्तों, बंदरों, बिल्लियों और अन्य जानवरों के काटने के मामले शामिल हैं। इसमें 107 मामले बिल्लियों के काटने के हैं। कुत्तों ने 351 और बंदरों ने 259 लोगों को काटा है।
सितंबर में 219 मामले आए थे जिनमें कुत्तों के काटने के 108, बंदरों के 69, बिल्लियों के 33 और अन्य जानवरों के काटने के 9 मामले शामिल हैं।
तीन महीनों के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 271 मामले दर्ज किए गए। इनमें कुत्तों के काटे गए लोगों की संख्या 122, बंदरों के 109, बिल्लियों के 36 और अन्य जानवरों के 9 मामले थे। अगस्त में 249 मामले आए जिसमें कुत्तों के काटे गए मामले 121, बंदर 81, बिल्लियों के 38 और अन्य जानवर के 9 थे। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार कुत्तों और बंदरों के काटने के मामले सबसे चिंताजनक हैं।
शिमला में बंदरों और लावारिस कुत्तों का आतंक लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। बंदर अक्सर घरों और बाजारों में घुसकर खाने-पीने की चीजें लूटते हैं, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते हैं। वहीं लावारिस कुत्ते आवासीय क्षेत्रों और सड़कों पर लगातार काटने की घटनाओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे लोग बाहर जाने से डरने लगे हैं। इन हमलों के कारण लोग निजी वाहन या टैक्सी पर निर्भर हैं और अस्पतालों में रैबीज और टिटनस के इंजेक्शनों की मांग बढ़ गई है।
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रैबीज, टिटनेस का रहता है खतरा
जानवरों के काटने से रैबीज, टिटनेस और अन्य संक्रमण का खतरा रहता है। रैबीज संक्रमण घातक हो सकता है, इसलिए किसी भी जानवर के काटे जाने की स्थिति में तुरंत अस्पताल आना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को सलाह दी है कि वह लावारिस कुत्तों, बंदरों और अनजान बिल्लियों के संपर्क में न आएं। घर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें, कूड़ा-कचरा खुले में न फैलाएं जिससे जानवर आकर्षित हों। यह जानवर अक्सर इंसानों के करीब आते हैं और कई बार संक्रमित हो सकते हैं। आईजीएमसी के चिकित्सकों ने बताया कि जानवर के काटने के तुरंत बाद सफाई, एंटी-रैबीज इंजेक्शन और इम्यूनोग्लोबुलिन यदि आवश्यक हो लगवाना बेहद जरूरी है।
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कुत्तों ने 351 और बंदरों ने 259 लोगों को काटा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में कुत्तों और बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में जुलाई से सितंबर तक 739 मामले जानवरों के काटने के आए हैं। इनमें कुत्तों, बंदरों, बिल्लियों और अन्य जानवरों के काटने के मामले शामिल हैं। इसमें 107 मामले बिल्लियों के काटने के हैं। कुत्तों ने 351 और बंदरों ने 259 लोगों को काटा है।
सितंबर में 219 मामले आए थे जिनमें कुत्तों के काटने के 108, बंदरों के 69, बिल्लियों के 33 और अन्य जानवरों के काटने के 9 मामले शामिल हैं।
तीन महीनों के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 271 मामले दर्ज किए गए। इनमें कुत्तों के काटे गए लोगों की संख्या 122, बंदरों के 109, बिल्लियों के 36 और अन्य जानवरों के 9 मामले थे। अगस्त में 249 मामले आए जिसमें कुत्तों के काटे गए मामले 121, बंदर 81, बिल्लियों के 38 और अन्य जानवर के 9 थे। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार कुत्तों और बंदरों के काटने के मामले सबसे चिंताजनक हैं।
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शिमला में बंदरों और लावारिस कुत्तों का आतंक लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। बंदर अक्सर घरों और बाजारों में घुसकर खाने-पीने की चीजें लूटते हैं, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते हैं। वहीं लावारिस कुत्ते आवासीय क्षेत्रों और सड़कों पर लगातार काटने की घटनाओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे लोग बाहर जाने से डरने लगे हैं। इन हमलों के कारण लोग निजी वाहन या टैक्सी पर निर्भर हैं और अस्पतालों में रैबीज और टिटनस के इंजेक्शनों की मांग बढ़ गई है।
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रैबीज, टिटनेस का रहता है खतरा
जानवरों के काटने से रैबीज, टिटनेस और अन्य संक्रमण का खतरा रहता है। रैबीज संक्रमण घातक हो सकता है, इसलिए किसी भी जानवर के काटे जाने की स्थिति में तुरंत अस्पताल आना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को सलाह दी है कि वह लावारिस कुत्तों, बंदरों और अनजान बिल्लियों के संपर्क में न आएं। घर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें, कूड़ा-कचरा खुले में न फैलाएं जिससे जानवर आकर्षित हों। यह जानवर अक्सर इंसानों के करीब आते हैं और कई बार संक्रमित हो सकते हैं। आईजीएमसी के चिकित्सकों ने बताया कि जानवर के काटने के तुरंत बाद सफाई, एंटी-रैबीज इंजेक्शन और इम्यूनोग्लोबुलिन यदि आवश्यक हो लगवाना बेहद जरूरी है।