डॉक्टर बाबू अब पर्ची पर इस तरह लिखेंगे दवाई
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अस्पतालों में डॉक्टरों को अब मरीज की पर्ची पर दवा का नाम कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा। इसे सख्ती से लागू करने को भारत सरकार कानूनी प्रावधान करने जा रही है। यह व्यवस्था अभी कानूनन अनिवार्य नहीं थी। इसके लिए इंडियन मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन में बदलाव किया जा रहा है। इसके बदलते ही हिमाचल सहित देश के तमाम राज्यों में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। पर्ची पर ब्रांडेड दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों के लिए यह बड़ा झटका होगा।
इससे जहां दवा कंपनियों से कमीशनखोरी पर रोक लगेगी, वहीं आम लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्वास्थ्य शिक्षा अली रजा रिजवी ने इस संबंध में 28 जुलाई को एक पब्लिक नोटिस जारी किया है। इसमें आम लोगों से सुझाव और फीडबैक मांगा है। ये सुझाव 17 अगस्त से पहले ali.rizvi@nic.in ई-मेल आईडी पर भेजे जा सकेंगे। रिजवी इससे पहले प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव भी रह चुके हैं।
इंडियन मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन में बदलाव की है तैयारी
वर्तमान में डॉक्टर भारतीय मेडिकल काउंसिल (प्रोफेशनल कंडक्ट, एटीकेट एंड एथिक्स) रेगुलेशन 2002 की धारा 1.5 के यूज ऑफ जेनरिक नेम्स ऑफ ड्रग्स के तहत ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसमें लिखा गया है कि अगर संभव हो तो डॉक्टर को किसी भी दवा का जेनरिक नाम ही प्रेस्क्राइब करना चाहिए। अब इसी धारा में बदलाव कर यह प्रावधान किया जा रहा है कि हर डॉक्टर दवाओं को जेनरिक नाम के साथ प्रिस्क्राइब करेगा। इसे स्पष्टता और अधिमान देकर कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा।
डा. डीएस गुरंग, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल प्रदेश ने बताया कि अभी तक कानूनी तौर पर चिकित्सकों की जेनरिक दवाओं को कैपिटल लेटर्स में लिखने की कोई बाध्यता नहीं है। बावजूद इसके जनहित में राज्य स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय पहले से ही सभी अस्पतालों के चिकित्सकों को जेनरिक दवाएं लिखने और इनके नाम भी कैपिटल लेटर्स में लिखने को पत्राचार कर रहा है। अगर यह कानूनन जरूरी हो जाएगा तो यह अच्छा होगा।