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शिमला: डीएनए रिपोर्ट और गुड़िया के शरीर पर दांतों के निशान ने चिरानी नीलू को दिलाई सजा

Sat, 19 Jun 2021 02:01 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 19 Jun 2021 02:01 PM IST
सार

विशेष अदालत में 15 जून को दोषी करार नीलू की सजा पर सुनवाई हुई थी। इसमें जांच एजेंसी सीबीआई ने अपराध को जघन्य अपराध की श्रेणी का बताया था। जिसमें एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और बाद में उसकी हत्या हुई है

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DNA report and gudiya teeth marks decided conviction of Chirani Neelu in shimla rape and murder case
दोषी नीलू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में विशेष जांच एजेंसी की ओर से नीलू चिरानी के खिलाफ अदालत में पेश साक्ष्य ही अहम रहे। इनके आधार पर ही मामले में गिरफ्तार नीलू को दोषी करार दिया गया। सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट, गुड़िया के शरीर पर दांतों के निशान और नीलू के जबड़े के मिलान की रिपोर्ट पेश की थी। इसके अलावा मौके पर आरोपी की मौजूदगी को लेकर स्थानीय लोगों के दर्ज बयान, आरोपी की ओर से नेपाली के ढारे से शराब की खरीद करने और नशे की हालत में स्थानीय लोगों की ओर से देखा जाना भी अहम रहा। एक और साक्ष्य भी सीबीआई के हाथ लगा था, जिसमें एक नेपाली महिला ने आरोपी को नशे की हालत में उससे छेड़खानी करने का बयान भी दर्ज कराया था।

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महिला की ओर से अदालत में आरोपी की फोटो से पहचान करने जैसे साक्ष्य नीलू के खिलाफ गए। इसी के आधार पर नीलू को अदालत ने दोषी करार देकर सजा का एलान किया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलीलों में नीलू को बेगुनाह साबित करने के लिए सीबीआई की चार्जशीट को सिर्फ पारिस्थितिक साक्ष्य पर आधारित बताकर यह दलील दी गई कि दोषी की अपराध करने की कोई योजना नहीं थी। दोषी नशे में था। दोषी के खिलाफ घटनास्थल पर ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला, जिससे उसकी मौजूदगी जंगल में शव के पास साबित हो। दोषी लंबे समय से उक्त स्थान पर काम कर रहा था, मगर उसकी किसी से दुर्व्यवहार करने जैसी कोई शिकायत नहीं थी। 
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जांच एजेंसी ने सीबीआई से की थी दोषी को फांसी की सजा की मांग 
 विशेष अदालत में 15 जून को दोषी करार नीलू की सजा पर सुनवाई हुई थी। इसमें जांच एजेंसी सीबीआई ने अपराध को जघन्य अपराध की श्रेणी का बताया था। जिसमें एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और बाद में उसकी हत्या हुई है। मृतका के शरीर पर पाए गए जख्मों को देखते हुए दोषी को पेश किए साक्ष्यों के आधार पर मौत की सजा की पैरवी की थी। दोषी का समाज के लिए कोई योगदान नहीं है। उसका परिवार के लिए भी कोई सहयोग नहीं रहा है। परिवार का कोई भी सदस्य सालों से इससे नहीं मिला है। वहीं, सीबीआई ने दोषी की पृष्ठभूमि को देखते हुए दोषी को मौत की सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी को कम से कम सजा दिए जाने की पैरवी की थी। 

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जांच एजेंसी की एक ही आरोपी होने की थ्योरी नहीं आ रही रास

 क्या गुड़िया को न्याय मिल पाया? प्रदेश के हर नागरिक के जहन में यह सवाल घूम रहा है। गुड़िया को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश हर किसी ने गुस्सा जाहिर कर गुनाहगारों को तुरंत गिरफ्तार कर फांसी पर लटकाने की मांग की। शिमला पुलिस सवालों के घेरे में आ चुकी थी। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ जब इस केस ने पुलिस की छवि को गहरा आघात पहुंचाया। बढ़ते जनाक्रोश के बीच मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने एक गुनहगार और प्रदेश पुलिस अफसरों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ खूब थपथपाई। क्या आज भी गुडि़या से दरिंदगी करने वाले खुले में घूम रहे हैं? इसका जवाब कोई भी जांच एजेंसी आज तक नहीं दे पाई। 

गुड़िया  दुष्कर्म मामले में सीबीआई की गिरफ्त में आए एकमात्र आरोपी को आखिर सजा सुना दी गई। लेकिन इस जघन्य अपराध के पीछे क्या केवल एक ही मुलजिम का हाथ था? इस बात को पचा पाना मुश्किल है। सीबीआई ने गुड़िया प्रकरण में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आरोपियों को यह कहकर रिहा करवा दिया कि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। इस कांड के पीछे मुलजिम नीलू के अलावा और कौन था इस पर से देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी भी पर्दा नहीं उठा पाई। गुड़िया के साथ दरिंदगी सामने आने के बाद पूरा प्रदेश धरना प्रदर्शन से उबल रहा था। देश के कई हिस्सों में भी गुड़िया के न्याय के लिए शांति पूर्ण प्रदर्शन हुए। हिमाचल में विधानसभा चुनाव नजदीक थे लिहाजा इस मामले पर राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीति भी खूब चमकाई। ठियोग और कोटखाई में जबरदस्त धरना प्रदर्शन हुए। 

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