मनमाने काम न करने पर करवा दिया डीएफओ का तबादला
नगर निगम में अब डीएफओ के तबादले पर भाजपा पार्षदों में शह और मात का खेल शुरू हो गया। डीएफओ का तबादला रद्द करवाने के लिए मेयर कुसुम सदरेट की अगुवाई में पार्षदों का दूसरा गुट हरकत में आ गया है। मेयर के साथ यह पार्षद वीरवार शाम वनमंत्री गोबिंद सिंह ठाकुर से मिलने प्रदेश सचिवालय पहुंचे थे।
इनमें भाजपा के स्थानीय नेता भी शामिल थे। इन्होंने वन मंत्री के समक्ष डीएफओ के अचानक तबादले को गलत करार दिया। कहा कि डीएफओ पिछले काफी समय से अच्छा काम कर रहे हैं। सालों से शहर के खतरनाक पेड़ जो हटाए नहीं गए थे उन्हें हटाकर जनता को राहत दी जा रही है।
अब अचानक उनके तबादले से यह सारा काम प्रभावित हो रहा है। पार्षदों ने कहा कि डीएफओ के काम से सिर्फ उन लोगों को तकलीफ हो रही है जो अपने मनमाने काम नहीं करवा पा रहे। ट्री कमेटी ने ऐसे कई मामले पकड़े हैं जिनमें जानबूझकर प्लॉट खाली करवाने के लिए पेड़ कटवाए जा रहे हैं। डीएफओ इनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे। सबने डीएफओ का तबादला रद्द करने की मांग रखी।
तबादले से नगर निगम में घमासान
डीएफओ शहरी इंद्र कुमार का तबादला कुछ दिन पहले ही हुआ था। बताया जा रहा है कि नगर निगम में भाजपा के कुछ पार्षद डीएफओ के काम से खुश नहीं थे। इन्होंने विभाग और मंत्री के समक्ष अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। इसके चंद दिन बाद ही डीएफओ का तबादला हो गया।
लेकिन अब मेयर की अगुवाई में बाकी पार्षदों के डीएफओ के समर्थन में उतरने से सियासत फिर गरमा गई है। इससे पहले भी भाजपा पार्षदों की आपसी खींचतान के चलते आयुक्त और डीएफओ ग्रामीण के तबादले हो चुके हैं। देखना होगा इस बार कौन सा गुट अपनी बात मनवाने में कामयाब रहता है।