शून्य लागत खेती योजना का नाम बदले जाने पर खड़े हुए सवाल
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शून्य लागत बजट खेती को बढ़ावा देने वाली ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ का नाम ‘सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती’ करने की कृषि विभाग की मुहिम पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार के ही अन्य महकमों ने सवाल किया है कि कृषि विभाग योजना का नाम क्यों बदलना चाहता है। पदमश्री सुभाष पालेकर महाराष्ट्र के विदर्भ के रहने वाले हैं, जिन्हें इस तरह की प्राकृतिक खेती का जनक माना जाता है।
अन्य महकमों ने इसलिए यह टिप्पणी की है कि अगर नाम बदलना है तो प्रदेश के किसी चर्चित किसान-बागवान पर योजना का नाम रखा जाए। विभिन्न विभागों के इन सवालों से कृषि विभाग की नाम बदलने की प्रक्रिया उलझ गई है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले जीरो बजट प्राकृतिक खेती को जमीन पर उतारने के लिए जयराम सरकार ने अपने पहले बजट में 25 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना शुरू करने का एलान किया था। योजना शुरू हुई तो लोगों ने इस खेती में आ रहे खर्च को देखते हुए शून्य बजट खेती बोले जाने पर एतराज जताया।
कुछ समय पहले इस विधा की खेती की शुरुआत करने वाले सुभाष पालेकर ने शिमला जिले के कुफरी में ही एक कार्यक्रम के दौरान इस खेती को जीरो बजट कहने पर सवाल उठा दिए। इसी के बाद राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस योजना को नया नाम देने की घोषण की थी।
इसके बाद कृषि विभाग ने नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार कर विभिन्न विभागों को उनकी राय के लिए भेज दिया। सूत्रों के अनुसार विभागों के सवाल उठाने के बाद अब कृषि विभाग के अधिकारी इन आपत्तियों को दूर करने में जुट गए हैं।
शून्य लागत खेती बोले जाने से लोगों में भ्र्रम की स्थिति थी। इसलिए उसका नाम बदला जा रहा है। विभाग नाम बदलने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की अगली बैठक में ले जाएगी और वहां से मंजूरी मिलने पर योजना का नाम बदल दिया जाएगा। - ओंकार शर्मा, प्रमुख सचिव, कृषि विभाग