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पार्षदों की मेहरबानी से गरीबों का हक मार रहे रसूखदार
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साल 2007 में निगम ने बनाए थे ढाई हजार से ज्यादा परिवारों के बीपीएल कार्ड
क्रॉसर
कइयों लोगों के हैं अब बहुमंजिला भवन
कई लोग हासिल कर चुके सरकारी नौकरियां
सभाओं में 70 फीसदी परिवार सूची से बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम के पार्षदों की मेहरबानी से सैकड़ों गरीब परिवारों के हिस्से का सस्ता राशन और सुविधाएं रसूखदार तथा नौकरीपेशा लोग हजम कर रहे हैं। नगर निगम की ओर से पार्षदों को दी बीपीएल परिवारों की सूची की जांच में यह खुलासा हुआ है।
शहर के जिन छह पार्षदों ने अपने वार्डों में बीपीएल कार्ड बनाने के लिए वार्ड सभाएं बुलाई हैं, वहां पुरानी सूची में से 70 फीसदी परिवार बाहर हो गए हैं। इस सूची में कई ऐसे लोग निकले हैं जो अब नौकरियां कर रहे हैं। कई पांच से छह मंजिला भवन बनाकर आलीशान गाड़ियों में घूम रहे हैं। टुटू वार्ड की सभा में कुछेक लोग अपने पुराने बीपीएल कार्ड रिन्यू करवाने पहुंचे थे। पार्षद विवेक शर्मा ने बताया कि इनके आवेदन रद्द किए हैं। विकासनगर वार्ड की बीपीएल सूची में कई बहुमंजिला भवन मालिक निकले। इनमें कइयों के पांच से सात किरायेदार भी हैं। लेकिन यह अभी भी बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। पार्षद रचना भारद्वाज ने कहा कि इनके आवेदन रद्द किए गए हैं। वार्ड में दूसरे जरूरतमंद गरीब लोगों को इस सूची में शामिल किया जा रहा है।
नगर निगम ने साल 2007 में ढाई हजार से अधिक गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए थे। इसके बाद शहर में नए कार्ड नहीं बने। बीते 14 सालों में इनमें से कई परिवार साधन संपन्न हो गए। कई लोगों ने बीपीएल कोटे से नौकरी ले ली। लेकिन नए कार्ड बनाने के लिए वार्ड सभाएं न होने से इनके नाम अभी तक बीपीएल की सूची में चल रहे हैं।
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पार्षदों को डर, सूची से नाम
काटा तो कट जाएगा वोट
शहर में नगर निगम के कई पार्षद अगले निगम चुनाव में फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव करीब पांच महीने दूर है। पार्षदों को डर है कि यदि बीपीएल सूची से किसी का नाम काटा तो उनके वोट कट जाएंगे। वोट की इसी राजनीति के चक्कर में रसूखदार बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं जबकि गरीब भटक रहे हैं। शहर में मेयर डिप्टी मेयर समेत 28 पार्षदों ने अपने वार्डों में बीपीएल कार्ड नहीं बनाए हैं। इनके 28 वार्डों में करीब दो हजार बीपीएल परिवारों की सूची में कई लोग बाहर होने हैं।
बीपीएल परिवारों को मिलती हैं यह सुविधाएं
बीपीएल कार्डधारक गरीब परिवार को सस्ता राशन मिलता है। निशुल्क उपचार के लिए बनने वाले आयुष्मान कार्ड भी इसी आधार पर बनते हैं। इसके अलावा बीपीएल कोटे से सरकारी नौकरी, स्कूलों में दाखिले, स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के लाभ भी मिलते हैं।
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क्रॉसर
कइयों लोगों के हैं अब बहुमंजिला भवन
कई लोग हासिल कर चुके सरकारी नौकरियां
सभाओं में 70 फीसदी परिवार सूची से बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम के पार्षदों की मेहरबानी से सैकड़ों गरीब परिवारों के हिस्से का सस्ता राशन और सुविधाएं रसूखदार तथा नौकरीपेशा लोग हजम कर रहे हैं। नगर निगम की ओर से पार्षदों को दी बीपीएल परिवारों की सूची की जांच में यह खुलासा हुआ है।
शहर के जिन छह पार्षदों ने अपने वार्डों में बीपीएल कार्ड बनाने के लिए वार्ड सभाएं बुलाई हैं, वहां पुरानी सूची में से 70 फीसदी परिवार बाहर हो गए हैं। इस सूची में कई ऐसे लोग निकले हैं जो अब नौकरियां कर रहे हैं। कई पांच से छह मंजिला भवन बनाकर आलीशान गाड़ियों में घूम रहे हैं। टुटू वार्ड की सभा में कुछेक लोग अपने पुराने बीपीएल कार्ड रिन्यू करवाने पहुंचे थे। पार्षद विवेक शर्मा ने बताया कि इनके आवेदन रद्द किए हैं। विकासनगर वार्ड की बीपीएल सूची में कई बहुमंजिला भवन मालिक निकले। इनमें कइयों के पांच से सात किरायेदार भी हैं। लेकिन यह अभी भी बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। पार्षद रचना भारद्वाज ने कहा कि इनके आवेदन रद्द किए गए हैं। वार्ड में दूसरे जरूरतमंद गरीब लोगों को इस सूची में शामिल किया जा रहा है।
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नगर निगम ने साल 2007 में ढाई हजार से अधिक गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए थे। इसके बाद शहर में नए कार्ड नहीं बने। बीते 14 सालों में इनमें से कई परिवार साधन संपन्न हो गए। कई लोगों ने बीपीएल कोटे से नौकरी ले ली। लेकिन नए कार्ड बनाने के लिए वार्ड सभाएं न होने से इनके नाम अभी तक बीपीएल की सूची में चल रहे हैं।
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पार्षदों को डर, सूची से नाम
काटा तो कट जाएगा वोट
शहर में नगर निगम के कई पार्षद अगले निगम चुनाव में फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव करीब पांच महीने दूर है। पार्षदों को डर है कि यदि बीपीएल सूची से किसी का नाम काटा तो उनके वोट कट जाएंगे। वोट की इसी राजनीति के चक्कर में रसूखदार बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं जबकि गरीब भटक रहे हैं। शहर में मेयर डिप्टी मेयर समेत 28 पार्षदों ने अपने वार्डों में बीपीएल कार्ड नहीं बनाए हैं। इनके 28 वार्डों में करीब दो हजार बीपीएल परिवारों की सूची में कई लोग बाहर होने हैं।
बीपीएल परिवारों को मिलती हैं यह सुविधाएं
बीपीएल कार्डधारक गरीब परिवार को सस्ता राशन मिलता है। निशुल्क उपचार के लिए बनने वाले आयुष्मान कार्ड भी इसी आधार पर बनते हैं। इसके अलावा बीपीएल कोटे से सरकारी नौकरी, स्कूलों में दाखिले, स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के लाभ भी मिलते हैं।