सीएम वीरभद्र के बारे में ये क्या बोल गए धूमल?
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि शिमला में पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करना न केवल निंदनीय है बल्कि असहनीय भी। जिस तरीके से युवा कांग्रेस ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन करते हुए हिंसा को अंजाम दिया, उसकी सीबीआई से जांच करवाई जानी चाहिए।
इस गुनाह में प्रदेश की पुलिस भी शामिल है। ऊना में पत्रकारों से बातचीत में धूमल ने राजभवन द्वारा उनकी व्यक्तिगत जांच फाइल को वापस भेजने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इसमें शामिल अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि वे समझदारी से काम लें।
आर्थिक संकट के लिए सरकार जिम्मेदार
वहीं, धूमल ने वीरभद्र सरकार को लपेटते हुए कहा कि महज दो साल में ही प्रदेश घोर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। हालत यह है कि वीरभद्र सरकार कर्मचारियों को उधार लेकर पगार दे रही है।
साथ ही तीन महीने से पेंशनभोगियों को पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है। भाजपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में 6,672 करोड़ कर्ज लिया था, जबकि कांग्रेस महज दो साल में ही 5 हजार करोड़ के आंकड़े को लांघ चुकी है।
उनके साथ पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा, विधायक वीरेंद्र कंवर आदि मौजूद रहे।
वीरभद्र सिलेक्टिव मेमोरी सीएम
धूमल ने कहा कि अंग्रेजी कहावत सिलेक्टिव मेमोरी की तर्ज पर वीरभद्र भी ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो सिर्फ अच्छा-अच्छा याद रखना चाहते हैं। उन्हें अपने गुनाह नजर नहीं आते।
कहा कि वीरभद्र सिंह के एजेंडे में दो ही मुख्य बिंदु हैं। पहला यह कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब कर दी जाए कि आने वाली सरकार प्रदेश को चला न सके और दूसरा यह कि कांग्रेस को इतना बदनाम कर दिया जाए कि उनके बाद प्रदेश में कोई कांग्रेस का नाम लेने वाला न हो।
शांता के सबसे बड़े आलोचक थे वीरभद्र
एक सवाल के जवाब में धूमल ने कहा कि आज भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार की तारीफों के पुल बांधने वाले वीरभद्र सिंह वही हैं जिन्होंने 1990 में शांता सरकार के दौरान उन्हें गोली चलाने वाला मुख्यमंत्री कहने के अलावा शांता पर संगीन इल्जाम लगाकर आलोचना की थी। वीरभद्र कब किसकी तारीफ कर दें और कब किसकी आलोचना इसलिए कोई किसी तरह की गलतफहमी में न रहे।