धर्मशाला: ज्वालामुखी मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता की विजिलेंस में भी शिकायत
शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता की जांच अब स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो भी कर सकता है। विजिलेंस ब्यूरो के पास यह मामला पहुंच गया है।
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प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता की जांच अब स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो भी कर सकता है। विजिलेंस ब्यूरो के पास यह मामला पहुंच गया है। अभी तक एसडीएम स्तर पर ही इस मामले की जांच हो रही है। एसडीएम स्तर की जांच में अनियमितता की पुष्टि हो चुकी है। जांच में इस बात का खुलासा हो चुका है कि श्रद्धालु की ओर से 28 दिसंबर को माता के मंदिर में भेंट की गई करीब तीन ग्राम सोने की नथ की एंट्री मंदिर के रिकॉर्ड में समय पर नहीं हो पाई। नियमानुसार चढ़ावा राशि की हर दूसरे दिन गणना और रजिस्टर पर एंट्री होना अनिवार्य है। 28 दिसंबर को भेंट की गई सोने की नथ की एंट्री रजिस्टर पर 29 को होनी चाहिए थी, लेकिन 30 दिसंबर तक रजिस्टर पर कुछ नहीं यानी अंग्रेजी में निल लिखा गया।
जब शोर मचा तो आनन-फानन में 31 दिसंबर को रजिस्टर पर सोने की नथ की एंट्री कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि गणना के समय मंदिर अधिकारी और लिपिकीय स्टाफ उपस्थित रहता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? इस मामले की शिकायत जब उपायुक्त के कार्यालय में हुई तो एसडीएम को जांच के निर्देश जारी हुए। एसडीएम ने मंदिर स्टाफ से पूछताछ की तो पाया कि 28 दिसंबर को चढ़ी सोने की नथ की एंट्री 29 के बजाय 31 दिसंबर को हुई। उपायुक्त कार्यालय में शिकायत के बाद एक श्रद्धालु ने मामले की शिकायत विजिलेंस में कर दी है। अब जब मामला विजिलेंस के पास पहुंच गया है तो माना जा रहा है कि मंदिर की व्यवस्था में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच हो सकती है। इससे कर्मचारियों में हड़कंप है।
कोई भी शिकायत पहले सीधे डीजीपी कार्यालय शिमला जाती है, उसके बाद संबंधित जिला में आती है। अगर जांच के लिए कहा जाता है तो निश्चित तौर पर जांच की जाएगी। -बद्री सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, विजिलेंस विभाग धर्मशाला
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