{"_id":"6786613a2654f3624e0ccbf1","slug":"dental-college-software-patient-troubled-by-problem-in-shimla-news-c-19-sml1001-471555-2025-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: डेंटल कॉलेज के सॉफ्टवेयर \nमें दिक्कत से मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: डेंटल कॉलेज के सॉफ्टवेयर में दिक्कत से मरीज परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाथों से पर्चियां बनाने में लग रहा समय
लोगों ने कॉलेज प्रबंधन से किया समाधान का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिमला की सॉफ्टवेयर प्रणाली में तकनीकी खराबी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। इस कारण मरीजों की पर्चियां बिना सीआर नंबर (क्लीनिकल रजिस्ट्रेशन नंबर) के हाथों से लिखी जा रही हैं। इससे न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि समय भी लग रहा है।
डेंटल कॉलेज शिमला में रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। लेकिन अब सॉफ्टवेयर में दिक्कत के चलते मरीज का पुराना रिकार्ड देखने में दिक्कत आ रही है। मरीजों की जानकारी के लिए नाम, सीआर नंबर आवश्यक होते हैं लेकिन आजकल उनके रिकॉर्ड नहीं रखे जा रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन के आला अधिकारियों को इसकी सूचना है, बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। अस्पताल आए नरेंद्र, अनीता और दिव्यांशी ने कहा कि सॉफ्टवेयर के क्रैश होने से मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
लोगों ने कॉलेज प्रबंधन से किया समाधान का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिमला की सॉफ्टवेयर प्रणाली में तकनीकी खराबी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। इस कारण मरीजों की पर्चियां बिना सीआर नंबर (क्लीनिकल रजिस्ट्रेशन नंबर) के हाथों से लिखी जा रही हैं। इससे न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि समय भी लग रहा है।
डेंटल कॉलेज शिमला में रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। लेकिन अब सॉफ्टवेयर में दिक्कत के चलते मरीज का पुराना रिकार्ड देखने में दिक्कत आ रही है। मरीजों की जानकारी के लिए नाम, सीआर नंबर आवश्यक होते हैं लेकिन आजकल उनके रिकॉर्ड नहीं रखे जा रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन के आला अधिकारियों को इसकी सूचना है, बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। अस्पताल आए नरेंद्र, अनीता और दिव्यांशी ने कहा कि सॉफ्टवेयर के क्रैश होने से मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन