सरकारी डस्टबिन में पनपा डेंगू, 8 मामलों से इस जिले में मचा हड़कंप
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जिला बिलासपुर के बाद अब कांगड़ा जिले में भी डेंगू ने पांव पसारे हैं। जयसिंहपुर उपमंडल की हरोट पंचायत में डेंगू के आठ मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। दो गांवों में सौ से ज्यादा परिवार हैं, जिनमें कोई न कोई सदस्य बीमार है। चौंकाने वाली बात है कि पंचायत को सरकार की ओर से दिए गए प्लास्टिक के कूड़ेदान में डेंगू का लारवा मिला है।
कांगड़ा जिले में शोध के लिए पहुंची नेशनल मलेरिया शोध संस्थान दिल्ली की टीम ने इसका खुलासा किया है। टीम ने पानी के सैंपल लेकर जांच को भेज दिए हैं। वहीं, डेंगू से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। बुखार से पीड़ितों को भी डेंगू होने का डर सता रहा है। जानकारी के अनुसार जिले के हरोट और जरयालाहड़ गांवों से बुखार के मामले रिपोर्ट हो रहे थे।
इसी बीच कांगड़ा में अपने शोध के लिए नेशनल मलेरिया शोध संस्थान दिल्ली की टीम आई हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने दो टीमों को हरोट और जरयालाहड़ गांवों में जांच के लिए भेज दिया। शनिवार को टीमों ने जांच के दौरान ही बुखार पीड़ित आठ लोगों में डेंगू की पुष्टि कर दी। इसके बाद टीमों ने डेंगू पनपने के संभावित स्थानों का जायजा लिया।
इस दौरान दोनों ही गांवों में सरकार की ओर से दिए गए प्लास्टिक के कूडे़दान से डेंगू का लारवा पाया गया। इसके अलावा धान के उखल (धान कूटने का स्थान) में भी पानी जमा था जिसमें डेंगू का लारवा मिला। टीमों ने गांवों से कुल 22 लोगों के सैंपल भी लिए। दोनों गांवों में 100 से ज्यादा परिवार हैं। 550 की आबादी वाले इस इलाके में तकरीबन हर परिवार से कोई न कोई सदस्य बीमार है। गांवों में दो आंगनबाड़ी केंद्र और एक हाई स्कूल भी है। ऐसे में डेंगू को लेकर लोगों में खासी दहशत हो गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि हरोट और जरयालाहड़ गांवों में नेशनल मलेरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की दो टीमें भेजी थीं। टीम ने आठ लोगों में डेंगू की पुष्टि की है। पानी और प्रभावित लोगों के खून के सैंपल लिए गए हैं। सरकार की ओर से दिए गए प्लास्टिक कूड़ेदान से डेंगू मच्छर का लारवा मिला है। रविवार को प्रभावित गांवों में फॉगिंग की जाएगी। टीम में धर्मशाला अस्पताल के डॉ. आरके सूद, लंबागांव अस्पताल से डॉ. मनीष राणा, लैब तकनीशियन इंदु देवी, एएनएम रीना देवी, सुभाष चंद भी मौजूद रहे।