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हिमाचल से उठी सेब के लिए एमएसपी की मांग
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किसान मंच ने पीएम को भेजा ज्ञापन, तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने का आग्रह
शिमला। हिमाचल प्रदेश से पहली बार सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने की मांग उठी है। प्रदेश के किसान-बागवान संघों के संयुक्त किसान मंच ने बुधवार को राजधानी शिमला में राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को इससे संबंधित ज्ञापन भेजा। मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बागवानों के संयुक्त हिल स्टेट हार्टीकल्चर फोरम एवं संयुक्त किसान मंच हिमाचल प्रदेश ने ज्ञापन के माध्यम से सेब के लिए 50 रुपये एमएसपी तय करने, फलों और सब्जियों को एमएसपी के दायरे में लाने, हिमाचल में एफसीआई द्वारा एमएसपी के तहत मक्की की पूरी खरीद के साथ धान गेहूं और दलहनों की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की।
तीन नए कृषि कानूनों से पहाड़ी राज्यों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला बल्कि भविष्य में इसके दुष्प्रभावों से असर पड़ने की संभावना है, इसलिए किसान-बागवानों के हित में कृषि कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई है। इसके अलावा-बागवानों के हित में सेब को विशेष उत्पाद घोषित कर एसएएफटीए के तहत आने वाले और भारत में सभी सेब आयातक देशों पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग की है। हरीश चौहान ने बताया कि राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से पहाड़ी राज्यों में किसानी और बागवानी को बचाने के लिए इन मांगों को तुुरंत प्राथमिकता के आधार पर पुरा करने का आग्रह किया है। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, संजय चौहान, सत्यवान पुंडीर, प्रो. राजेंद्र चौहान, गोविंद चतरांटा, सुशील चौहान, राजेश नेगी, ओम चौहान, विनोद और संदीप चौहान सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश से पहली बार सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने की मांग उठी है। प्रदेश के किसान-बागवान संघों के संयुक्त किसान मंच ने बुधवार को राजधानी शिमला में राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को इससे संबंधित ज्ञापन भेजा। मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बागवानों के संयुक्त हिल स्टेट हार्टीकल्चर फोरम एवं संयुक्त किसान मंच हिमाचल प्रदेश ने ज्ञापन के माध्यम से सेब के लिए 50 रुपये एमएसपी तय करने, फलों और सब्जियों को एमएसपी के दायरे में लाने, हिमाचल में एफसीआई द्वारा एमएसपी के तहत मक्की की पूरी खरीद के साथ धान गेहूं और दलहनों की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की।
तीन नए कृषि कानूनों से पहाड़ी राज्यों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला बल्कि भविष्य में इसके दुष्प्रभावों से असर पड़ने की संभावना है, इसलिए किसान-बागवानों के हित में कृषि कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई है। इसके अलावा-बागवानों के हित में सेब को विशेष उत्पाद घोषित कर एसएएफटीए के तहत आने वाले और भारत में सभी सेब आयातक देशों पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग की है। हरीश चौहान ने बताया कि राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से पहाड़ी राज्यों में किसानी और बागवानी को बचाने के लिए इन मांगों को तुुरंत प्राथमिकता के आधार पर पुरा करने का आग्रह किया है। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, संजय चौहान, सत्यवान पुंडीर, प्रो. राजेंद्र चौहान, गोविंद चतरांटा, सुशील चौहान, राजेश नेगी, ओम चौहान, विनोद और संदीप चौहान सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
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