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सीयू पर केंद्र और हिमाचल से दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Tue, 31 May 2016 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरागोपीपुर (कांगड़ा)
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरागोपीपुर (कांगड़ा) Updated Tue, 31 May 2016 10:15 AM IST
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Delhi High Court seeks answer from  himachal govt on central university
दिल्ली उच्च न्यायलय

पिछले सात-आठ साल से धर्मशाला और देहरा के बीच लटके केंद्रीय विश्वविद्यालय का मसला अब दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद शर्मा के अनुसार न्यायालय की बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार से हलफनामे के माध्यम से चार हफ्तों में जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।

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30 मई को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव और हिमाचल सरकार की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल सूर्य नारायण पेश हुए। इनके समय मांगे जाने पर न्यायालय ने अगली सुनवाई आठ अगस्त 2016 को तय की है।
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विनोद शर्मा ने बताया कि देहरा निवासी नरोत्तम नरेश वालिया और सीयू संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष करनैल सिंह पटियाल की ओर से दायर जनहित याचिका संख्या डब्ल्यूपीसी 5087-2016 की पैरवी उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम अधिवक्ता जी. तुषार और विनोद शर्मा ने की। याचिका के अनुसार सीयू एक्ट के तहत हिप्र में सीयू की स्थापना का निर्णय 20 जनवरी 2010 को लिया गया था।
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सीयू का 70 फीसदी हिस्सा ब्यास कैंपस के तौर पर देहरा में, 20 से 30 फीसदी हिस्सा धौलाधार कैंपस के तौर पर धर्मशाला में बनना था। याचिका में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा 8 अप्रैल 2010 को गठित सिलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 23 अप्रैल 2010 को भारत सरकार ने फैसला लिया कि इसका अस्थायी कैंपस धर्मशाला में शुरू कर दिया जाए और जब तक स्थायी कैंपस नहीं बन

जाता, तब तक सीयू की कुछ कक्षाएं किराए के भवन में शुरू कर दी जाएं। याचिका के अनुसार 29 अक्तूबर 2010 को देहरा में चयनित भूमि का इंतकाल भी सीयू के नाम कर दिया गया है। 26 जून 2014 को पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने इस भू भाग को स्वीकृति भी दी। बावजूद इसके अभी तक सीयू की स्थापना देहरा में नहीं हो पाई।

हाईकोर्ट परिसर में नया ब्लाक न बनने पर सरकार से जवाबतलबी

Delhi High Court seeks answer from  himachal govt on central university
हिमाचल हाईकोर्ट

बिना बजट के शिलान्यास  करने को लेकर चल रहे मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से जवाबतलबी की है। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि हाईकोर्ट में नए ब्लॉक का निर्माण कब शुरू होगा। इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पांच नवंबर 2013 को किया था।

कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि हाईकोर्ट परिसर में एक नए ब्लॉक को बनाने के लिए ढाई साल पहले शिलान्यास किया गया था लेकिन अभी तक निर्माण को लेकर कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया। 25 मई 2015 को प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से बिना बजट के शिलान्यास वाले मामलों का ब्योरा मांगा था।

प्रार्थी ने कहा था कि सरकार बदलने पर पिछले कार्यों को भूल जाती है और वोटों की राजनीति के चक्कर में हमारे नेता बिना बजट के ही शिलान्यास करते रहते हैं। कई मामलों में पिछली सरकार के अधूरे कार्यों को पूरा करने की जगह उसे रद्द कर दिया जाता है। जिससे जनता के धन का दुरुपयोग होता है। मामले पर सुनवाई 20 जून को होगी।

ट्रकों का सुरक्षित आना-जाना सुनिश्चित करें डीसी-एसपी

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कोर्ट

हाईकोर्ट ने सोलन और बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक, जिलाधीश को निर्देश दिए कि मांगल लैंड लूजर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के ट्रकों को बिना रोक-टोक और सुरक्षित अपने इलाकों से आने-जाने दिया जाए। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सोसाइटी की याचिका की प्रारंभिक सुनवाई में ये आदेश पारित किए।

प्रार्थी सोसाइटी का आरोप है कि जेपी सीमेंट कंपनी के साथ माल ढुलाई को जुड़ी अन्य सोसाइटियों के गतिरोध से उन्हें फैक्टरी परिसर में आने-जाने में बाधा उत्पन्न की जा रही है। हालांकि, यह तथ्य सक्षम अथॉरिटी के ध्यान में भी लाया गया, लेकिन ये सोसाइटियां उनके कार्य में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। गतिरोध का मुख्य कारण है कि कंपनी ने लंबे समय से ढुलाई के दाम सोसाइटी सदस्यों को अदा नहीं किए हैं।

प्रार्थी सोसाइटी ने दलील दी है कि उनका झगड़ा वास्तव में कंपनी से है। इस कारण उन्हें वेवजह तंग करना कानूनी तौर पर जायज नहीं है। प्रार्थी सोसाइटी में सैकड़ों सदस्य हैं, जो माल ढुलाई में लगे हैं। कोर्ट ने प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाबतलब किया है। मामले पर सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

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