मनी लॉन्ड्रिंग केस: वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी को मिली बड़ी राहत
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र व पुत्री को राहत प्रदान कर दी है। अदालत ने उनकी संपत्ति जब्ती मामले में ईडी के अंतरिम आदेश को जारी रखा है लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि अथॉरिटी कोई अंतिम निर्णय नहीं देगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने कहा कि पिछले वर्ष अप्रैल में अदालत ने 23 मार्च 2016 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा संपत्ति जब्ती मामले में अंतिम कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसे में उनका मानना है कि ईडी द्वारा संपत्ति जब्ती संबंधी प्रोविजनल आदेश जारी रहेगा लेकिन यदि संबंधित प्राधिकरण कोई अंतिम आदेश पारित करती है तो इस याचिका के निपटारे तक वह प्रभावी नहीं माना जाएगा। अदालत ने याचिका पर केंद्र सरकार व ईडी को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 26 जुलाई तय की है।
सीएम के बेटा और बेटी ने दी थी ईडी आदेश को चुनौती
अदालत ने यह निर्देश वीरभद्र की बेटी अपराजिता कुमारी और बेटे विक्रमादित्य सिंह के ईडी के 31 मार्च को संपत्ति जब्ती संबंधी प्रोविजनल निर्णय को चुनौती याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। इससे पहले दोनों ने 23 मार्च 2016 को इसी प्रकार के आदेश को चुनौती दी थी।
पिछले साल 30 मई को उच्च न्यायालय ने वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ ईडी के संपत्ति जब्ती कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करना आवश्यक है क्योंकि इसमें कानून के विभिन्न प्रश्न शामिल हैं।
अपराजिता कुमारी और विक्रमादित्य सिंह की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने तर्क रखा कि बिना आरोप पत्र के इस तरह की कार्रवाई उसके मुवक्किलों के खिलाफ नहीं की जा सकती। ईडी के लिए पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि यह याचिका समय पूर्व दायर की गई है, ईडी ने अभी मात्र संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज की है और याची को बुलाया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ईडी द्वारा पेश इस मामले में उनका नाम बतौर आरोपी नहीं है। वहीं 31 मार्च को पास किए गए आदेश में भी उनके खिलाफ कोई अपराध दर्ज है। ईडी ने अपराजिता की 15,85,639 रुपये की संपत्ति और विक्रमादित्य की 62,86,747 रुपये की संपत्ति को जब्त किया है।