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CM के आश्वासन के बावजूद इलाज को तरसी दीपिका, नौ दिन बाद मौत

Sun, 25 Mar 2018 01:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सोलन
अमर उजाला ब्यूरो, सोलन Updated Sun, 25 Mar 2018 01:28 PM IST
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Deepika kidney failure died in PGI Chandigarh

हिमाचल की एक और बेटी ने उपचार न मिलने पर दम तोड़ दिया है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में किडनी ट्रांसप्लांट न होने के चलते दसवीं की छात्रा को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया था, लेकिन वहां उसे दाखिल ही नहीं किया गया।

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शुक्रवार रात को नौवें दिन उसने दम तोड़ दिया। पीड़िता का परिवार बेहद गरीब (बीपीएल) है। बेहतर इलाज और मदद के लिए परिजन और इलाके के ग्रामीण सीएम जयराम ठाकुर से भी मिले।
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पीजीआई में मुफ्त उपचार का आश्वासन दिया गया, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। हालांकि, छात्रा की मां बेटी के लिए एक किडनी देने को भी तैयार थी।

शुक्रवार सुबह 109 डिग्री बुखार होने पर उसे दाखिल तो किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी था। हिमाचल में बेहतर इलाज और सुविधाओं के बेशक दावे किए जाते हों, लेकिन हालात सबके सामने हैं।

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दोनों किडनियां खराब थीं

Deepika kidney failure died in PGI Chandigarh

सोलन के अर्की की दीपिका (16) की दोनों किडनियां खराब थीं। उसका आईजीएमसी में इलाज चल रहा था। सेहत में सुधार न होने पर उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया, लेकिन अव्यवस्थाओं के आगे मासूम ने दम तोड़ दिया। दीपिका की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

दीपिका की मां अमरा देवी और छोटे भाई नीलकमल ने बताया कि पहले दिन उन्होंने गुरुद्वारे में शरण ली और इसके बाद एक कमरा किराये पर लेकर रहने लगे। वे रोजाना आईजीएमसी की पर्चियां लेकर पीजीआई आपातकालीन कक्ष में जाते थे, लेकिन उन्हें डॉक्टर न होने या अभी कोई इमरजेंसी होने की बात कहकर लौटा दिया जाता।

इस बीच कुनिहार से एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिला था। उन्हें मुख्यमंत्री ने दीपिका के उपचार का सारा खर्च उठाने का मौखिक आश्वासन भी दिया। नीलकमल के अनुसार शुक्रवार सुबह दीपिका की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई।

उसे 109 डिग्री बुखार चढ़ गया। इसके बाद वे फिर दीपिका को पीजीआई के आपातकालीन कक्ष में ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे नौ दिन बाद पहली बार दाखिल किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और रात करीब दस बजे दीपिका ने दम तोड़ दिया।

उपचार ही नहीं हुआ

Deepika kidney failure died in PGI Chandigarh

दीपिका के ताया दीप राम ने बताया कि अगर पीजीआई में सही समय पर उपचार होता तो आज उनकी बच्ची जिंदा होती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मुफ्त उपचार का भरोसा दिलाया था। खर्च का आकलन पीजीआई को बनाना था। समय रहते यह आकलन प्रदेश सरकार को भेजा जाता तो सरकारी मदद मिल सकती थी।

अमर उजाला के मामला उठाने पर उठे थे मदद को हाथ
अमर उजाला के मामला उठाने के बाद दीपिका के इलाज में मदद को कई आगे आए थे। कुल्लू कालेज में इतिहास विभाग की प्रोफेसर पी डोलमा ने एक लाख रुपये की मदद भेजी थी। इसके अलावा यही नहीं दीपिका की मां खुद किडनी देने को तैयार थीं।

केस की छानबीन की जाएगी

Deepika kidney failure died in PGI Chandigarh

पीजीआई चंडीगढ़ की प्रवक्ता मंजू वडवालकर का कहना है कि इस केस की छानबीन की जाएगी। परिजनों को यह बताना होगा कि वे पहली बार पीजीआई में किस डॉक्टर से मिले और उनकी पर्चियां देखने के बाद डॉक्टर ने उस पर क्या लिखा।

परिजनों को इस संबंध में शिकायत दर्ज करवानी होगी। तभी मामले की छानबीन आगे बढ़ सकती है। फिलहाल, यह मामला ध्यान में नहीं है।

दावों तक सीमित रह गए नेता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के हिमाचल प्रदेश के होने के बावजूद सूबे में घोषणाओं के बावजूद आजतक न एम्स स्थापित हुआ और न प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल पाई। ऊना में पीजीआई का सेटेलाइट चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की घोषणा पर भी अमल नहीं हुआ।

बीपीएल परिवार 25 लाख जुटाता रहा, बेटी ने तोड़ दिया पीजीआई में दम 
धर्मपुर (मंडी)।
सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं स्वास्थ्य योजनाएं धर्मपुर के मंडप की 20 वर्षीय रेणुका को भी जिंदगी नहीं दे सकी थीं। वह लीवर इन्फेक्शन से ग्रस्त थी। पीजीआई चंडीगढ़ में रेणुका के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 25 से 30 लाख रुपये की जरूरत थी, लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार इतनी रकम जुटा पाने में असमर्थ था।

रेणुका के पिता लश्करी राम कई दिन तक पैसे के इंतजाम में दर-दर भटकते रहे। सोशल मीडिया के सहारे और कॉलेज के विद्यार्थियों ने चंदे से कुछ रकम तो एकत्र की, लेकिन रेणुका का स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ गया और उसने 8 मार्च को दम तोड़ दिया। छात्रा बीपीएल परिवार से संबंधित थी।

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