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हिमाचल सरकार ने माना होता ये सुझाव तो नहीं होती कंगाल

Tue, 15 Nov 2016 12:07 AM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 15 Nov 2016 12:07 AM IST
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Debt ridden Himachal govt had not implemented Resource Mobilization Committee report

हिमाचल सरकार का खजाना खाली हो गया है। कर्मचारियों-पेंशनरों तक को वेतन एवं पेंशन देने के लिए हाल ही में 1000 करोड़ का फिर कर्ज लेना पड़ा है। विकास कार्यों पर अतिरिक्त खर्च करना तो दूर की बात हो गई है। सूबे पर 36,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्जा चढ़ चुका है, जिस पर 3500 से 3700 करोड़ रुपये तक का सालाना ब्याज भी देना पड़ रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार खर्चे घटाने को तैयार नहीं है। 

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दो साल पहले खर्च घटाने के उपाय सुझाने को मंत्रिमंडल की एक उप समिति भी बनाई गई, मगर इसकी रिपोर्ट राज्य सचिवालय के सामान्य प्रशासन विभाग के पास साल भर से धूल फांक रही है। 23 अगस्त 2014 को हिमाचल मंत्रिमंडल ने राज्य की आर्थिक स्थिति को दुरुस्त करने के लिए राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में ‘रिसोर्स मोबेलाइजेशन एंड इकोनामी’ नाम से कैबिनेट सब कमेटी भी बनाई थी। इसके सदस्य जीएस बाली और मुकेश अग्निहोत्री बनाए गए थे। 
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कौल सिंह ठाकुर ने कारण स्पष्ट किए बगैर इस कमेटी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने वक्त नहीं दे पाने की बात की। फिर विद्या स्टोक्स इसकी अध्यक्ष बनाई गई। उनकी अध्यक्षता में कमेटी ने आम जनता से भी सुझाव लिए। इन सुझावों पर चर्चा के बाद ही उस समिति ने रिपोर्ट तैयार की। ये रिपोर्ट राज्य मंत्रिमंडल में पेश की जानी थी, मगर इसकी फाइल साल भर सचिवालय के एक कोने में दबी पड़ी है।

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इनके खर्चे घटाने को कहा था

Debt ridden Himachal govt had not implemented Resource Mobilization Committee report
हिमाचल प्रदेश सरकार

रिपोर्ट में अनावश्यक खर्चों को घटाने और आमदनी बढ़ाने की बातें की गईं। सूत्रों ने बताया कि इस कमेटी ने घाटे में चल रहे बोर्डों-निगमों को मुनाफा कमा रहे निगमों-बोर्डों में मर्ज करने को कहा। कमेटी ने आबकारी और खनन नीतियों को अधिक बेहतर बनाने का भी सुझाव दिया। 

मंत्रियों, मुख्य संसदीय सचिवों, निगमों-बोर्डों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों के खर्चों को घटाने की बातें कीं। सरकारी वाहनों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने और सरकारी वाहनों की संख्या को घटाने का भी उपाय सुझाया गया। अधिकारियों के टीए, डीए को भी कम करने की सिफारिश की। 

शहरों और कस्बों में चल रहे जेलों को अन्यत्र शिफ्ट कर इनके वाणिज्यिक इस्तेमाल की बात की। ऐसे तमाम कार्यालयों को स्थानांतरित कर उनका सरकारी आमदनी के लिए इस्तेमाल करने की बातें हुईं। बागवानी, बिजली परियोजनाओं, पर्यटन से आय बढ़ाने की सिफारिश की गई। 

स्टोक्स बोलीं- अधिकारियों से पूछूंगी, रिपोर्ट का क्या किया

Debt ridden Himachal govt had not implemented Resource Mobilization Committee report

वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि वे अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त और अन्य अधिकारियों से पूछेंगी कि इस रिपोर्ट का क्या किया गया। इसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल में अपने संसाधनों को विकसित करने की कोशिश कर रही है। 

बाली बोले- मैंने दे दिए थे अपने सुझाव 
कैबिनेट सब कमेटी के सदस्य रहे परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि उन्होंने अपने सुझाव दे दिए थे। ये सुझाव उन्होंने बहुत पहले दे दिए हैं। 

सचिव बोले- जीएडी को भेज दी है फाइल  
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी रिसोर्स मोबलाइजेशन के लिए बनाई गई कैबिनेट सब कमेटी के सदस्य रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट बहुत पहले सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को भेज दी गई है।

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