फॉरेंसिक लैब पर पुलिस मुख्यालय के हाथ खड़े, कहा- सीआईडी को दे दो
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साइबर फॉरेंसिक लैब का जिम्मेदारी लेने से पुलिस मुख्यालय ने फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं। साइबर मामलों की जांच और प्रशिक्षण को लेकर आ रही दिक्कतों का हवाला देते हुए पुलिस मुख्यालय ने एक बार फिर सरकार से लैब को सीआईडी को सौंपने की मांग की है। पुलिस की इस मांग पर सरकार नए सिरे से विचार कर रही है।
केंद्र सरकार ने हिमाचल में साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित करने के लिए पांच करोड़ से ज्यादा की राशि आवंटित की थी। प्रदेश सरकार के गठन के शुरूआती दिनों में हिमाचल पुलिस इसे मंडी में स्थापित करने और आईआईटी मंडी तथा एनआईआईटी हमीरपुर से तकनीकी मदद लेकर आधुनिक तरीके से संचालित करने का प्लान बना रही थी।
इसी बीच सरकार ने लैब स्थापित करने और फॉरेंसिक का पूरा काम फॉरेंसिक साइंस विभाग को दे दिया। शुरू में तो पुलिस ने आपत्ति नहीं की लेकिन अब पुलिस के अधिकारियों ने जांच और ट्रेनिंग का काम प्रभावित होने का हवाला देते हुए इसे सीआईडी को देने की मांग की है। नाम न लिखने की शर्त पर सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विवेचना में साइबर की जानकारी और जांच में बेहतर तालमेल के लिए साइबर लैब का पुलिस के अधीन होना जरूरी है।
उधर, एफएसएल ने साइबर लैब स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। एफएसएल शिमला के निदेशक अरुण शर्मा ने कहा कि केंद्र से बजट मिलने के बाद लैब स्थापित करने और उपकरणों की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द लैब शुरू हो जाए ताकि साइबर मामलों की जांच में वैज्ञानिक आधार वाला सहयोग दिया जा सके।