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Shimla News: विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा में गीत पेश कर लूटी वाहवाही
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शिमला के गेयटी थियेटर में आयोजित हॉबी कॉल्स के छात्रों ने दी प्रस्तुतियां।संवाद
गेयटी में हॉबी कक्षाओं का समापन, छात्राओं ने नटराज नृत्य की दी प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर में हॉबी कक्षाओं का शुक्रवार को समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने गौथिक हाल के मंच पर प्रशिक्षण में सीखी गतिविधियों की प्रस्तुति दी। इस दौरान चित्रकला प्रदर्शनी लगाई गई। दोपहर दो बजे के बाद विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा में स्वयं, अपने परिवार और मित्रों का परिचय दिया। इसके अलावा बच्चों ने आपस में जर्मन भाषा में सवाल पूछे और उनके जवाब दिए। विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा में सप्ताह के दिनों का परिचय दिया और इसी भाषा में गीत की प्रस्तुति भी दी। इस वर्ष पहली बार इन कक्षाओं में जर्मन भाषा के प्रशिक्षण को जोड़ा गया है। करीब 21 विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लिया। छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें नृत्य की शुरुआत नटराज की स्तुति के साथ हुई। इसके बाद छात्राओं ने तीन ताल और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी।
इसके बाद एक्टिंग कक्षा के विद्यार्थियों ने कर्फ्यू नाटक का मंचन किया। इसमें दंगे फसाद और मजहबी लड़ाई झगड़े से दूर रहने का संदेश दिया। इस नाटक का लेखन वरिष्ठ लेखक राकेश मोहन और निर्देशन मोहन जोशी ने किया है। नाटक में दिखाया गया कि सभी जाति के लोग एक जगह खड़े होकर बस का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वहां पर हिंदू-मुस्लिम के आपसी झगड़े की वजह से कर्फ्यू लगा हुआ था, जिसकी वजह से वहां बसें नहीं आ रही थीं। वहीं कम पैसों में टैक्सी वाले भी ले जाने को नहीं मान रहे थे। वहां खड़े लोग कर्फ्यू के चलते बेहद परेशान हो चुके थे। ऐसे में वहां खड़ी एक साध्वी ने वहां लड़ रहे लोगों को समझाया कि दंगे फसाद और मजहबी लड़ाई झगड़े से सभी लोगों को किस तरह की परेशानियां हो रही हैं। इसलिए जितना हो सके इन झगड़ों से दूर रहो। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एनआरएचएम के मिशन निदेशक डॉ. निपुण जिंदल व विशेष अतिथि के रूप में भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक मंजीत शर्मा और सेवानिवृत्त आईएएस व वरिष्ठ साहित्यकार एसएन जोशी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर में हॉबी कक्षाओं का शुक्रवार को समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने गौथिक हाल के मंच पर प्रशिक्षण में सीखी गतिविधियों की प्रस्तुति दी। इस दौरान चित्रकला प्रदर्शनी लगाई गई। दोपहर दो बजे के बाद विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा में स्वयं, अपने परिवार और मित्रों का परिचय दिया। इसके अलावा बच्चों ने आपस में जर्मन भाषा में सवाल पूछे और उनके जवाब दिए। विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा में सप्ताह के दिनों का परिचय दिया और इसी भाषा में गीत की प्रस्तुति भी दी। इस वर्ष पहली बार इन कक्षाओं में जर्मन भाषा के प्रशिक्षण को जोड़ा गया है। करीब 21 विद्यार्थियों ने जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लिया। छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें नृत्य की शुरुआत नटराज की स्तुति के साथ हुई। इसके बाद छात्राओं ने तीन ताल और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी।
इसके बाद एक्टिंग कक्षा के विद्यार्थियों ने कर्फ्यू नाटक का मंचन किया। इसमें दंगे फसाद और मजहबी लड़ाई झगड़े से दूर रहने का संदेश दिया। इस नाटक का लेखन वरिष्ठ लेखक राकेश मोहन और निर्देशन मोहन जोशी ने किया है। नाटक में दिखाया गया कि सभी जाति के लोग एक जगह खड़े होकर बस का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वहां पर हिंदू-मुस्लिम के आपसी झगड़े की वजह से कर्फ्यू लगा हुआ था, जिसकी वजह से वहां बसें नहीं आ रही थीं। वहीं कम पैसों में टैक्सी वाले भी ले जाने को नहीं मान रहे थे। वहां खड़े लोग कर्फ्यू के चलते बेहद परेशान हो चुके थे। ऐसे में वहां खड़ी एक साध्वी ने वहां लड़ रहे लोगों को समझाया कि दंगे फसाद और मजहबी लड़ाई झगड़े से सभी लोगों को किस तरह की परेशानियां हो रही हैं। इसलिए जितना हो सके इन झगड़ों से दूर रहो। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एनआरएचएम के मिशन निदेशक डॉ. निपुण जिंदल व विशेष अतिथि के रूप में भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक मंजीत शर्मा और सेवानिवृत्त आईएएस व वरिष्ठ साहित्यकार एसएन जोशी मौजूद रहे।
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