{"_id":"6aafc1e62edb41a6d401d004","slug":"cultural-news-shimla-shimla-news-c-19-sml1002-789525-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: कवालिया देवता की पूजा के साथ भैंस पालकों का जातर मेला संपन्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: कवालिया देवता की पूजा के साथ भैंस पालकों का जातर मेला संपन्न
विज्ञापन
पीरन और सतलाई पंचायतों के लोगों ने खीर के भंडारे का उठाया लुत्फ
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा क्षेत्र की सुरम्य चोटी कवालिया में भैंस पालकों का पारंपरिक जातर मेला कवालिया देवता की पूजा के साथ संपन्न हो गया। मेले में पीरन और सतलाई पंचायतों के सैंकड़ों लोगों ने कवालिया देवता का आशीर्वाद प्राप्त करके खीर के भंडारे का आनंद उठाया।
समुद्र तल से करीब आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कवालिया मंदिर आदीकाल से पूरे क्षेत्र के भैंस पालकों की आस्था का केंद्र है। कवालिया पीक प्रकृति सौंदर्य से भरपूर है। मूलभूत सुविधाओं के सृजन से यह स्थल प्रदेश में प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभर सकता है। कवालिया देवता के पुजारी जबर सिंह ठाकुर ने बताया कि सैलानी इस स्थल पर पहुंचकर प्रकृति की अनुपम छटा तथा हिमालय पर्वत की हिमाच्छादित चोटियों और मैदानी क्षेत्रों का आनंद उठा सकते हैं। बताया कि यह स्थल पर्यटक स्थल चायल और कुफरी से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है। सैलानी कोटी से पजौली घाटी तक वाहन और इसके बाद करीब दो किलोेमीटर पैदल सफर करके कवालिया चोटी पर पहुंच सकते हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ माह के दौरान ग्राम पंचायत पीरन और सतलाई के किसान अपनी भैसाें को लेकर कवालिया पहुंचते हैं और कार्तिक महीने में दिवाली से कुछ दिन पहले जातर उत्सव के बाद वापस जाते हैं। कवालिया में भैंस पालकों की ओर से अस्थायी मकान निर्मित किए गए हैं जहां पर भैंस पालक छह माह तक कैंप के रूप में जीवन व्यतीत करते हैं।
विज्ञापन
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा क्षेत्र की सुरम्य चोटी कवालिया में भैंस पालकों का पारंपरिक जातर मेला कवालिया देवता की पूजा के साथ संपन्न हो गया। मेले में पीरन और सतलाई पंचायतों के सैंकड़ों लोगों ने कवालिया देवता का आशीर्वाद प्राप्त करके खीर के भंडारे का आनंद उठाया।
समुद्र तल से करीब आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कवालिया मंदिर आदीकाल से पूरे क्षेत्र के भैंस पालकों की आस्था का केंद्र है। कवालिया पीक प्रकृति सौंदर्य से भरपूर है। मूलभूत सुविधाओं के सृजन से यह स्थल प्रदेश में प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभर सकता है। कवालिया देवता के पुजारी जबर सिंह ठाकुर ने बताया कि सैलानी इस स्थल पर पहुंचकर प्रकृति की अनुपम छटा तथा हिमालय पर्वत की हिमाच्छादित चोटियों और मैदानी क्षेत्रों का आनंद उठा सकते हैं। बताया कि यह स्थल पर्यटक स्थल चायल और कुफरी से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है। सैलानी कोटी से पजौली घाटी तक वाहन और इसके बाद करीब दो किलोेमीटर पैदल सफर करके कवालिया चोटी पर पहुंच सकते हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ माह के दौरान ग्राम पंचायत पीरन और सतलाई के किसान अपनी भैसाें को लेकर कवालिया पहुंचते हैं और कार्तिक महीने में दिवाली से कुछ दिन पहले जातर उत्सव के बाद वापस जाते हैं। कवालिया में भैंस पालकों की ओर से अस्थायी मकान निर्मित किए गए हैं जहां पर भैंस पालक छह माह तक कैंप के रूप में जीवन व्यतीत करते हैं।
विज्ञापन