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सीटी स्कैन मशीनों के टेंडर रद्द, दवाइयां न मिलने पर जवाबतलब

Mon, 24 Jun 2019 10:32 AM IST
अरविन्द ठाकुर धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला, शिमला
धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 24 Jun 2019 10:32 AM IST
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CT Scan machines tender cancelled in Himachal pradesh by State govt
आईजीएमसी शिमला - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी समेत सूबे के विभिन्न अस्पतालों में मशीनें खराब होने के कारण कई दिनों से सीटी स्कैन नहीं हो रहे हैं। इसी बीच टेंडर रद्द होने के कारण प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों में नई सीटी स्कैन मशीनें लगाने का मामला फिर लटक गया है। सरकार ने मशीनें लगाने के लिए फर्मों से जो टेंडर आमंत्रित किए थे, उनमें कई कंपनियों के दस्तावेज अधूरे मिले तो कई कंपनियां पात्र ही नहीं थीं।

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इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन मशीनें लगाने के टेंडर ही रद्द कर दिए। अब निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा ने नए सिरे से मशीनें लगाने के लिए आवेदन मांगे हैं। यह बात भी सामने आई है कि स्वास्थ्य विभाग ने मशीनें लगाने के लिए जो आवेदन मांगे थे, उनमें टेंडर की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं थी, इसलिए भी कई फर्मों को उलझन हुई।
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सीटी स्कैन मशीनें न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में ज्यादा रकम खर्च कर सीटी स्कैन करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर भी आमंत्रित कर लिए थे। अब यह मामला फि र लटक गया है। इससे पहले लोकसभा चुनाव के चलते यह मामला फंसा रहा। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने  टेंडर रद्द करने की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि नए सिरे से टेंडर लगा दिए गए हैं, जो कि 4 जुलाई को खुलेंगे।
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सीटी स्कैन मशीनें खराब
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में पिछले छह दिन से सीटी स्कैन मशीन खराब है। इससे प्रदेश के कोने-कोने से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज परेशान हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य महकमा नींद में है। वहीं डीडीयू में पिछले तीन दिनों से मशीन बंद पड़ी है। उधर मेडिकल कॉलेज नाहन में तीन दिन से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने के कारण मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे।

हिमाचल के अस्पतालों में दवाइयां न होने पर प्रदेश सरकार ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) व मेडिकल अधिकारियों (एसएमओ) से जवाब तलब किया है। स्वास्थ्य निदेशक ने जोनल अस्पताल धर्मशाला, शिमला, मंडी के अलावा क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कुल्लू, सोलन, सिरमौर,

नाहन, ऊना सहित सिविल अस्पताल रोहडू, पालमपुर के सीएमओ और मेडिकल अफसरों को नोटिस जारी किया है। इन अस्पतालों में निशुल्क दवाइयां न मिलने से लोगों को मेडिकल स्टोर में दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों की शिकायत के चलते सरकार ने सख्ती दिखाई है। 

स्वास्थ्य निदेशक की ओर से अफसरों को यह नोटिस 19 तारीख को भेजे गए हैं। साथ ही इसकी एक कॉपी अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान को भी भेजी है। अस्पतालों में दो सौ से अधिक दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं। इनमें लगभग सभी तरह की दवाइयां शामिल होती हैं। सरकार को संदेह है कि स्टोर में दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद इन्हें मरीजों को क्यों नहीं दिया जा रहा है। 

जेनेरिक दवाइयां ही लिख सकते हैं डॉक्टर
सरकार ने डॉक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखना ही अनिवार्य किया है। साथ ही डॉक्टरों को ये निर्देश भी दिए हैं कि सिर्फ वही दवाइयां बाहर से लिखी जानी चाहिए, जो इन केंद्रों में उपलब्ध नहीं होंगी। बाकायदा, इसके लिए डॉक्टरों को मौजूदा दवाइयों की सूची भी दी गई है। 
 

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