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Shimla News: सतलुज योजना पर संकट, राजधानी में जारी रहेगी अभी पानी की राशनिंग
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22 केवी बिजली से 66 केवी की मशीनरी चलाना पड़ा महंगा, दो माह में ही 200 बार ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर जलने पर सामने आई लापरवाही
अचानक बंद हो रहे हैं पंप, लाइन में लीकेज का खतरा
पेयजल कंपनी ने अब टाटा कंसलटेंसी से मांगी मदद
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने के लिए तैयार की गई सतलुज पेयजल योजना पर संकट मंडरा गया है। दवाडा पंपिंग स्टेशन पर तीन हफ्ते से ठप पड़ा बिजली ट्रांसफार्मर दुरुस्त होने के बावजूद अब पेयजल कंपनी इस योजना को चलाने से डर रही है। पेयजल कंपनी ने पंपिंग शुरू करने से पहले टाटा कंसलटेंसी से मदद मांगी है।
22 केवी बिजली सब स्टेशन से योजना की 66 केवी क्षमता वाली पंपिंग मशीनरी चलानी है या नहीं, यदि चलानी है तो इसमें क्या बदलाव किए जाएं, इन सब पर रिपोर्ट मांगी है। टाटा की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अब यह योजना शुरू होगी। तब तक शिमला शहर में पानी की राशनिंग जारी रहेगी। शहर में गर्मियों के दौरान पानी का संकट न रहे, इसके लिए पेयजल कंपनी ने इस योजना को अप्रैल से शुरू कर दिया था। योजना में पंपिंग मशीनरी 66 केवी की है लेकिन इसके लिए तीनों पंपिंग स्टेशनों पर 22 केवी के ही सब स्टेशन लगाए गए। कंपनी ने 22 केवी स्टेशन से ही इनका संचालन शुरू किया। पहले कुछ हफ्ते तो यह योजना ठीक चली और शहर में पानी की किल्लत दूर हुई। दो महीने पहले यह योजना हांफने लगी। योजना के तीनों पंपिंग स्टेशन शकरोड़ी, दवाडा और डूम्मी में लो वोल्टेज और ट्रिपिंग के कारण कई बार पंप बंद हुए। कंपनी ने इस चूक को सामने नहीं आने दिया और योजना चलाए रखी। सूत्रों के अनुसार बीते दो महीने में करीब 200 बार योजना में ट्रिपिंग की समस्या आई। आमतौर पर नई योजनाओं में इतनी ट्रिपिंग करीब पांच साल में आती है। योजना का संचालन कर रही साईं फाउंडेशन ने बिजली बोर्ड और पेयजल कंपनी को इसकी सूचना दी। इसी बीच दवाडा में जब बिजली ट्रांसफार्मर जला तो योजना की पोल खुल गई।
पंपिंग मशीनरी और वॉल्व में लीकेज तक का खतरा
बिजली बोर्ड ने अब दवाडा में ट्रांसफार्मर तो ठीक कर दिया है लेकिन कंपनी योजना को शुरू नहीं कर रही। साईं फाउंडेशन को चिंता है कि 22 केवी बिजली से 66 केवी की पंपिंग मशीनरी चलाई तो इससे इन मशीनों को भी नुकसान हो सकता है। इन मशीनों का निर्माण करने वाली कंपनी भी सुझाव दे चुकी है कि इन्हें 66 केवी सब स्टेशन से ही चलाया जाए। इसके अलावा 750 एमएम आकार वाली पेयजल लाइनों में लगे एयर वॉल्व और नॉन रिटर्न वॉल्व में लीकेज का खतरा है। बिजली ट्रिपिंग के चलते अचानक पंप बंद होने से इन वॉल्व पर प्रेशर पड़ रहा है। हालत यह है कि दो महीने में ही इनकी मरम्मत करनी पड़ी है। कंपनी इन दिनों इनकी मरम्मत कर रही है। यदि इनमें लीकेज हुई तो पेयजल लाइनों के साथ लगते इलाकों में बड़ी तबाही हो सकती है।
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पैसा देने के बावजूद बिजली बोर्ड ने नहीं किया काम
पेयजल कंपनी का दावा है कि बिजली बोर्ड को पहले ही 66 केवी सब स्टेशन लगाने को कहा था। बाकायदा इसका पैसा भी समय पर जमा करवाया गया। बिजली बोर्ड ने 66 की जगह 22 केवी के सब स्टेशन लगा दिए। पहले दावा किया कि इनसे 15 एमएलडी तक पानी की आपूर्ति हो जाएगी लेकिन अब जब लो वोल्टेज और ट्रिपिंग होने लगी तो बोर्ड जल्द 66 केवी स्टेशन लगाने के दावे कर रहा है। हालांकि, इसका काम 2028-29 तक ही पूरा होगा। तब तक यह योजना कैसे चलेगी, इस पर संकट है। हालांकि कंपनी को उम्मीद है कि टाटा कंसलटेंसी कुछ बदलाव के साथ योजना को चलाने के सुझाव दे सकती है।
अभी चल रहे हैं मरम्मत कार्य
सतलुज योजना के दवाडा स्टेशन पर बिजली ट्रांसफार्मर ठीक हो गया है। अभी पेयजल लाइनों के वॉल्व आदि की रिपेयर की जा रही है। जल्द ही योजना को शुरू कर दिया जाएगा।
-वीरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रबंध निदेशक पेयजल कंपनी
14 अगस्त को दुरुस्त कर दिया है ट्रांसफार्मर
बिजली बोर्ड ने दवाडा पंपिंग स्टेशन पर ट्रांसफार्मर में आई खराबी को ठीक कर दिया है। इसकी टेस्टिंग पूरी कर दी है। 14 अगस्त से ही पेयजल कंपनी को बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी है। अब कंपनी ने फैसला लेना है कि कब पंपिंग करनी है।
-पुनीत सोंधी, अधीक्षण अभियंता, बिजली बोर्ड
आंकड़ों में समझें योजना
-15 एमएलडी पानी मिल रहा था सतलुज योजना से शिमला को
- 66 एमएलडी कुल पानी मिलना है इस योजना से
- 500 करोड़ से ज्यादा पैसा खर्च हुआ है इस योजना पर
राजधानी में बढ़ रहा पानी का
संकट, लोग झेल रहे परेशानी
शिमला। शहर को अभी अन्य पांच परियोजनाओं से औसतन 40 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर को रोज पानी देने के लिए करीब 48 एमएलडी पानी चाहिए। कम आपूर्ति मिलने से कंपनी ने शहर में पानी की राशनिंग की है।
लोगों को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। बारिश होते ही गिरि में गाद आ रही है जिससे पानी का शेड्यूल चौथे दिन में जा रहा है। न्यू शिमला, समरहिल में सोमवार को तीसरे दिन भी शाम तक पानी नहीं मिला। इससे लोग परेशान हैं। महापौर सुरेंद्र चौहान भी कंपनी की बैठक ले चुके हैं। इसमें बिजली बोर्ड और कंपनी के अधिकारियों को इस संकट से निपटने का रास्ता निकालने को कहा गया है।
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22 केवी बिजली से 66 केवी की मशीनरी चलाना पड़ा महंगा, दो माह में ही 200 बार ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर जलने पर सामने आई लापरवाही
अचानक बंद हो रहे हैं पंप, लाइन में लीकेज का खतरा
पेयजल कंपनी ने अब टाटा कंसलटेंसी से मांगी मदद
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने के लिए तैयार की गई सतलुज पेयजल योजना पर संकट मंडरा गया है। दवाडा पंपिंग स्टेशन पर तीन हफ्ते से ठप पड़ा बिजली ट्रांसफार्मर दुरुस्त होने के बावजूद अब पेयजल कंपनी इस योजना को चलाने से डर रही है। पेयजल कंपनी ने पंपिंग शुरू करने से पहले टाटा कंसलटेंसी से मदद मांगी है।
22 केवी बिजली सब स्टेशन से योजना की 66 केवी क्षमता वाली पंपिंग मशीनरी चलानी है या नहीं, यदि चलानी है तो इसमें क्या बदलाव किए जाएं, इन सब पर रिपोर्ट मांगी है। टाटा की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अब यह योजना शुरू होगी। तब तक शिमला शहर में पानी की राशनिंग जारी रहेगी। शहर में गर्मियों के दौरान पानी का संकट न रहे, इसके लिए पेयजल कंपनी ने इस योजना को अप्रैल से शुरू कर दिया था। योजना में पंपिंग मशीनरी 66 केवी की है लेकिन इसके लिए तीनों पंपिंग स्टेशनों पर 22 केवी के ही सब स्टेशन लगाए गए। कंपनी ने 22 केवी स्टेशन से ही इनका संचालन शुरू किया। पहले कुछ हफ्ते तो यह योजना ठीक चली और शहर में पानी की किल्लत दूर हुई। दो महीने पहले यह योजना हांफने लगी। योजना के तीनों पंपिंग स्टेशन शकरोड़ी, दवाडा और डूम्मी में लो वोल्टेज और ट्रिपिंग के कारण कई बार पंप बंद हुए। कंपनी ने इस चूक को सामने नहीं आने दिया और योजना चलाए रखी। सूत्रों के अनुसार बीते दो महीने में करीब 200 बार योजना में ट्रिपिंग की समस्या आई। आमतौर पर नई योजनाओं में इतनी ट्रिपिंग करीब पांच साल में आती है। योजना का संचालन कर रही साईं फाउंडेशन ने बिजली बोर्ड और पेयजल कंपनी को इसकी सूचना दी। इसी बीच दवाडा में जब बिजली ट्रांसफार्मर जला तो योजना की पोल खुल गई।
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पंपिंग मशीनरी और वॉल्व में लीकेज तक का खतरा
बिजली बोर्ड ने अब दवाडा में ट्रांसफार्मर तो ठीक कर दिया है लेकिन कंपनी योजना को शुरू नहीं कर रही। साईं फाउंडेशन को चिंता है कि 22 केवी बिजली से 66 केवी की पंपिंग मशीनरी चलाई तो इससे इन मशीनों को भी नुकसान हो सकता है। इन मशीनों का निर्माण करने वाली कंपनी भी सुझाव दे चुकी है कि इन्हें 66 केवी सब स्टेशन से ही चलाया जाए। इसके अलावा 750 एमएम आकार वाली पेयजल लाइनों में लगे एयर वॉल्व और नॉन रिटर्न वॉल्व में लीकेज का खतरा है। बिजली ट्रिपिंग के चलते अचानक पंप बंद होने से इन वॉल्व पर प्रेशर पड़ रहा है। हालत यह है कि दो महीने में ही इनकी मरम्मत करनी पड़ी है। कंपनी इन दिनों इनकी मरम्मत कर रही है। यदि इनमें लीकेज हुई तो पेयजल लाइनों के साथ लगते इलाकों में बड़ी तबाही हो सकती है।
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पैसा देने के बावजूद बिजली बोर्ड ने नहीं किया काम
पेयजल कंपनी का दावा है कि बिजली बोर्ड को पहले ही 66 केवी सब स्टेशन लगाने को कहा था। बाकायदा इसका पैसा भी समय पर जमा करवाया गया। बिजली बोर्ड ने 66 की जगह 22 केवी के सब स्टेशन लगा दिए। पहले दावा किया कि इनसे 15 एमएलडी तक पानी की आपूर्ति हो जाएगी लेकिन अब जब लो वोल्टेज और ट्रिपिंग होने लगी तो बोर्ड जल्द 66 केवी स्टेशन लगाने के दावे कर रहा है। हालांकि, इसका काम 2028-29 तक ही पूरा होगा। तब तक यह योजना कैसे चलेगी, इस पर संकट है। हालांकि कंपनी को उम्मीद है कि टाटा कंसलटेंसी कुछ बदलाव के साथ योजना को चलाने के सुझाव दे सकती है।
अभी चल रहे हैं मरम्मत कार्य
सतलुज योजना के दवाडा स्टेशन पर बिजली ट्रांसफार्मर ठीक हो गया है। अभी पेयजल लाइनों के वॉल्व आदि की रिपेयर की जा रही है। जल्द ही योजना को शुरू कर दिया जाएगा।
-वीरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रबंध निदेशक पेयजल कंपनी
14 अगस्त को दुरुस्त कर दिया है ट्रांसफार्मर
बिजली बोर्ड ने दवाडा पंपिंग स्टेशन पर ट्रांसफार्मर में आई खराबी को ठीक कर दिया है। इसकी टेस्टिंग पूरी कर दी है। 14 अगस्त से ही पेयजल कंपनी को बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी है। अब कंपनी ने फैसला लेना है कि कब पंपिंग करनी है।
-पुनीत सोंधी, अधीक्षण अभियंता, बिजली बोर्ड
आंकड़ों में समझें योजना
-15 एमएलडी पानी मिल रहा था सतलुज योजना से शिमला को
- 66 एमएलडी कुल पानी मिलना है इस योजना से
- 500 करोड़ से ज्यादा पैसा खर्च हुआ है इस योजना पर
राजधानी में बढ़ रहा पानी का
संकट, लोग झेल रहे परेशानी
शिमला। शहर को अभी अन्य पांच परियोजनाओं से औसतन 40 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर को रोज पानी देने के लिए करीब 48 एमएलडी पानी चाहिए। कम आपूर्ति मिलने से कंपनी ने शहर में पानी की राशनिंग की है।
लोगों को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। बारिश होते ही गिरि में गाद आ रही है जिससे पानी का शेड्यूल चौथे दिन में जा रहा है। न्यू शिमला, समरहिल में सोमवार को तीसरे दिन भी शाम तक पानी नहीं मिला। इससे लोग परेशान हैं। महापौर सुरेंद्र चौहान भी कंपनी की बैठक ले चुके हैं। इसमें बिजली बोर्ड और कंपनी के अधिकारियों को इस संकट से निपटने का रास्ता निकालने को कहा गया है।