{"_id":"57e69b0c4f1c1b3b5aa8247f","slug":"vidyanath-surrender-at-hamirpur-court-in-hpsssb-cheating-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"चयन बोर्ड की भर्तियों में घपला करने के आरोपी ने किया सरेंडर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चयन बोर्ड की भर्तियों में घपला करने के आरोपी ने किया सरेंडर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Sun, 25 Sep 2016 10:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की भर्तियों में धांधली के बहुचर्चित मामले में दोषी तत्कालीन बोर्ड सदस्य डॉ. विद्यानाथ ने शनिवार सुबह कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद विद्यानाथ को जेल भेज दिया गया है।
विज्ञापन
दो अभ्यर्थियों सहित अब तक तीन दोषी जेल पहुंच चुके हैं जबकि तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष एसएम कटवाल अभी गिरफ्त से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों को 26 सितंबर से पहले आत्मसमर्पण करने का वक्त दिया है, लेकिन अब तक तीन दोषी ही जेल पहुंच पाए हैं जबकि चौथे दोषी तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष एसएम कटवाल पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
विज्ञापन
मामले में दोषी एक शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा को विजिलेंस ने चंबा, टीजीटी के लिए चयनित मदन गोपाल को ऊना से एक हफ्ता पहले गिरफ्तार किया था। दोनों को हमीरपुर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया जबकि तत्कालीन बोर्ड सदस्य विद्यानाथ को भी जेल भेज दिया है। एएसपी विजिलेंस बलबीर सिंह का कहना है कि दोषी डॉ. विद्यानाथ ने शनिवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इन्हें जेल भेज दिया गया है। एसएम कटवाल की गिरफ्तारी को टीमें छापामारी कर रही हैं।
विज्ञापन
यह है मामला
हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर (अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग) में वर्ष 2001-02 में सरकारी पदों पर नियुक्तियां के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगे। एसएम कटवाल उस समय बोर्ड के चेयरमैन थे जबकि डॉ. विद्यानाथ बोर्ड के सदस्य। वर्ष 2004 में सत्ता बदलते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती मामले की जांच करवाई।
विजिलेंस ने कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद सेशन कोर्ट हमीरपुर ने चेयरमैन एसएम कटवाल, सदस्य डॉ. विद्यानाथ, शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा और टीजीटी शिक्षक मदन गोपाल को दोषी मानते हुए एक-एक साल की सजा सुनाई। फैसले को आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए सेशन कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सजा बरकरार रखी।