चार फोन नंबरों से जुड़े खातों में डाल दी बीस हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति
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हिमाचल के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में कितना बड़ा गड़बड़झाला हुआ है।
यह इससे पता चलता है कि पिछले चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। यह तो बानगी भर है।
इस मामले की प्रथम दृष्टया जांच में पता चला है कि 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति भी चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।
लगभग 150 करोड़ के इस घोटाले की प्रारंभिक जांच में ये खुलासा हुआ है। शिक्षा विभाग की इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मामले की जांच सीबीआई को देने का एलान किया है।
निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रखा
शिक्षा विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रखा। साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी किसी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं की।
विभिन्न आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर लिखकर बैंक खाते खुलवाए गए। इन नंबरों पर ही ओटीपी प्राप्त कर फर्जी तरीके से धनराशि निकाली गई। चार साल के दौरान केंद्र सरकार से प्राप्त हुई कुल छात्रवृत्ति राशि का अस्सी फीसदी बजट निजी संस्थानों को ही बांट दिया गया।
चार साल में 2772 शिक्षण संस्थानों के 2.38 लाख पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी की गई। इसमें 2506 सरकारी संस्थानों को मात्र 56 करोड़ और 266 निजी शिक्षण संस्थानों को 210 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई।
केंद्र सरकार कर रही है मामले की मॉनीटरिंग
छात्रवृत्ति घोटाले की केंद्र सरकार गहनता से मानीटरिंग कर रही है। जनजातीय विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने साल 2013 से 2016 तक जारी हुई छात्रवृत्ति राशि का संस्थानों सहित ब्योरा मांगा है।
ऐसे किया गया छात्रवृत्ति घोटाला
2013-14 4648 36 2209
2014-15 8012 112 1747
2015-16 4235 31 1247
2016-17 3020 181 526
कुल 19915 360 5729