मोदी का ऐसा असर कि सबको मिल रही 'क्लीन चिट'
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केंद्र में मोदी सरकार बनते ही हिमाचल के भाजपा नेताओं और कई बड़े पुलिस अफसरों को क्लीन चिट मिलने लगी है। इनके खिलाफ मामले की जांच कर रही स्टेट विजिलेंस आए दिन भ्रष्टाचार के मामलों में कोई सबूत न मिलने का दावा कर क्लोजर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
यही विजिलेंस एक साल पहले इन नेताओं को जेल में डालने तक के दावे कर रही थी। मगर एकाएक सरकार का रुख बदलने के बाद विजिलेंस भी महज जांच का दावा कर इन मामलों को बंद कर रही है।
अब स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और पूर्व डीजीपी डा. डीएस मन्हास के खिलाफ चल रही सीडी मामले की जांच बंद कर दी है। छानबीन के बाद विजिलेंस ने क्लोजर रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज दी है। इस मामले में विजिलेंस को कुछ भी हाथ नहीं लगा है।
कांग्रेस चार्जशीट के आधार पर खोली थी जांच
कांग्रेस चार्जशीट में होने के कारण स्टेट विजिलेंस ने इस केस की फिर से जांच खोली थी। भाजपा कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री धूमल और डीजीपी मन्हास के बीच कथित बातचीत की इस सीडी की सीआईडी से जांच कराई थी।
सीआईडी ने महीनों जांच के बाद मामले की अनट्रेस रिपोर्ट बनाकर जांच बंद कर दी थी। बहुचर्चित इस मामले की शुरुआत शिमला में मीडिया कार्यालयों को भेजे पार्सल से हुई थी।
इसमें सीडी और लिखित सामग्री थी। इस सीडी में धूमल और मन्हास के बीच विजिलेंस के मामलों की जांच के संबंध में दिशा निर्देशों के अलावा अन्य कई बातें रिकॉर्ड की गई थीं।
धूमल समेत कई मामलों में मिल चुकी क्लीन चिट
विजिलेंस ब्यूरो इससे पहले पैन कार्ड मामले में पूर्व सीएम धूमल के खिलाफ जांच बंद करवा चुकी है। उन पर दो पेन कार्ड बनवाकर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया था। मगर बाद में इस केस को बंद करवा दिया गया है।
इसके अलावा एंटी हेल गन की खरीद फरोख्त के मामले में भी कोई सबूत न मिलने की बात कह चुकी है। यह मामला पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा से जुड़ा है।
साथ ही एचपीसीए के एक मामले में भी पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल को आरोपी न बनाने की बात मानी है। एचपीसीए से जुड़े तीन मामले विजिलेंस ने दर्ज किए थे लेकिन एक भी मामले में पुख्ता सबूत नहीं तलाश पाई।
कहीं सीएम का सीबीआई केस तो वजह नहीं
एकाएक भाजपा नेताओं को मिल रही क्लीन चिट के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि कहीं यह सीबीआई केस का असर तो नहीं है। गौरतलब है कि सीएम वीरभद्र से जुड़ा एक मामला सीबीआई के पास है जिसकी जांच चल रही है।
कांग्रेस कार्यकाल में तो वीरभद्र सिंह ने सीबीआई की ज्यादा परवाह नहीं की। मगर अब मोदी सरकार आते ही सुर बदलने लगे हैं।
सवाल उठ रहे हैं कि कहीं सरकार का यह नरम रवैया इस कारण तो नहीं बना है।