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हिमाचल के पूर्व डीजी मन्हास और भंडारी पर लटकी तलवार

Sun, 20 Apr 2014 09:07 AM IST
Updated Sun, 20 Apr 2014 09:07 AM IST
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State vigilence completed the inquiry of phone taping case

हिमाचल में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए फोन टैपिंग मामले की जांच विजिलेंस ने पूरी कर ली है। अब जांच टीम मामले को अभियोजन की मंजूरी के लिए भेजने से पूर्व कानूनी सलाह ले रही है।

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मामले में मुख्य आरोपी पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विजिलेंस इस मामले को उनकी सेवानिवृत्ति से पूर्व अभियोजन मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजना चाहती है।
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इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो सेवानिवृत्त पूर्व डीजीपी बी. कमल कुमार को गवाह बना चुका है। इसमें दो पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी और डा. डीएस मन्हास पर केस चलाया जा सकता है।

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टेलीकॉम कंपनियों पर भी कार्रवाई की तैयारी

State vigilence completed the inquiry of phone taping case

इसके अलावा सीआईडी के टेक्निकल विंग के एक इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है।

फोन टैपिंग मामले में विवादों में आए पूर्व पुलिस प्रमुख आईडी भंडारी को विवाद के कारण पुलिस प्रमुख के पद से भी हाथ धोना पड़ा था। वर्तमान में वे डीजी होमगार्ड के पद पर तैनात हैं।

विजिलेंस के अनुसार करीब 417 फोन नंबरों को बिना किसी अनुमति के टैप करने की बात भी जांच में सामने आई है। इस मामले में कुछ सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को भी सह आरोपी बनाया जा रहा है। आठ विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के मोबाइल फोन टैपिंग पर लगाए थे।

दो पूर्व डीजीपी समेत 35 लोगों से हो चुकी पूछताछ

State vigilence completed the inquiry of phone taping case

इनमें कुछ कंपनियों पर निर्धारित समय से अधिक समय तक बिना अनुमति के टैपिंग की बात सामने आई है। ऐसे में उन्हें भी इस मामले में सह आरोपी बनाया जा सकता है।

चार्जशीट की फाइल तैयार हो चुकी है अगले सप्ताह कभी भी गृह विभाग को सौंपी जा सकती है।

विजिलेंस की जांच टीम इस मामले में पूर्व डीजीपी टीम तीन पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी, डीएस मन्हास, बी.कमल कुमार, एक आईपीएस, दो आईजी, आठ मोबाइल कंपनियों को नोडल ऑफिसर के अलावा सीआईडी के टेक्निकल सैल के कर्मचारियों सहित करीब 35 लोगों के पूछताछ कर चुके हैं।

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