यहां से खरीदी थी तेंदुए की खाल और सोलन में सौदा, पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्ति को बताया गुप्तचर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
होटल में तेंदुए की खाल के तार हरियाणा और सिरमौर से जुड़ गए हैं। गिरफ्तार आरोपी इसे राजगढ़ के किसी गांव से खरीदकर लाए थे। महज चौबीस घंटे की पड़ताल में इस केस में और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
पुलिस और वन विभाग की टीम ने जिन तीन लोगों को आरोपी बताकर उनके साथ फोटो खिंचवाए थे, अब उनमें से एक को वन विभाग अपना गुप्तचर बता रहा है। साथ ही एफआईआर में भी खाल के खरीदार का नाम शामिल नहीं है। दोनों विभाग उसे सरकारी गवाह के तौर पर पेश कर रहे हैं।
वन विभाग की मानें तो खाल तस्कर गिरोह का सिरा ढूंढने में करीब डेढ़ माह का वक्त लग गया और अब आगे की कड़ियां जल्द ही जोड़ी जाएंगी। वन विभाग ने अपने गुप्तचर के माध्यम से खाल का सौदा 70 लाख में तय किया था।
वन विभाग ने ऐसे पकड़ा मामला
एक तरफ आरोपी खाल बेचने की जुगत भिड़ा रहे थे तो ठीक उसी वक्त वन विभाग पांच टीमें गठित कर आरोपियों को दबोचने की रणनीति में जुटा था। होटल को चारों तरफ से घेर लिया गया और ऐन मौके पर पुलिस को भी सूचना दे दी गई।
कार से उतर कर एक आरोपी जब खरीदार के साथ होटल में दाखिल हो गया तो दूसरा होटल के बाहर ही खड़ा था। इस बीच सिग्नल मिलते ही वन विभाग व पुलिस की टीम ने होटल में दबिश दे दी। यह देखकर होटल के बाहर खड़ा आरोपी भाग निकला।
जिसे करीब ढाई किलोमीटर दूर जाकर वन विभाग की टीम ने दबोच लिया। मामले की शुरुआत में वन विभाग ने तीनों को आरोपी करार देते हुए प्रेस कांफ्रेंस कर डाली। लेकिन बाद में खरीदार को अपना आदमी बताकर हाथ पीछे खींच लिए।
खाल तस्करी के आरोपी चार दिन के रिमांड पर
तेंदुए की खाल समेत गिरफ्तार दोनों आरोपियों संजय कुमार पुत्र बलवंत निवासी नाका जोड़ियां हरियाणा व मनीष कोहली पुत्र रूपराम कोहली निवासी विवेक बिहार अंबाला को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। दोनों को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
एसपी मोहित चावला ने बताया कि वन विभाग ने लिखित में तीसरे व्यक्ति को गुप्तचर करार दिया है। इसके बावजूद पुलिस कॉल डिटेल के आधार पर आगामी कार्रवाई करेगी। फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद मांगी गई है। कॉल डिटेल में संदेहजनक पाए जाने पर पुलिस तीसरे व्यक्ति पर भी कार्रवाई करेगी।
वन विभाग ने बनाया था प्लान
सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी पवन कुमार का कहना है कि खाल तस्करों को दबोचने के लिए वन विभाग ने बड़ा प्लान बनाया था। करीब डेढ़ माह से टीम इस पर काम कर रही थी। विभाग ने अपने गुप्तचर को खरीदार बनाकर होटल भेजा था। आगे की जांच के लिए टीमें सिरमौर और हरियाणा भी जाएंगी। आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम 51 की धारा 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है।