गिनीज बुक का रिकार्ड नहीं, फर्जीवाड़े का अनोखा कीर्तिमान
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आपने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में कम उम्र में उच्च शिक्षा हासिल करने के कई रिकार्ड सुने होंगे। मगर हिमाचल शिक्षा बोर्ड ने 13 वर्ष के बच्चे को 10वीं का फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर अनोखा कीर्तिमान रचा है। यह छात्र आठवीं फेल था। अब पता लगने के सात साल बाद बोर्ड को यह सर्टिफिकेट रद्द करना पड़ा।
प्रतीक नाम के इस अभ्यर्थी पर बोर्ड की किसी भी परीक्षा में बैठने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। ड्यूटी में लापरवाही पर बोर्ड कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। प्रारंभिक जांच के पश्चात कर्मचारियों को चार्जशीट किया जा सकता है।
जुलाई में आयोजित बोर्ड की बैठक में प्रमाण पत्र को रद्द करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मामला वर्ष 2007 का है। प्रतीक शर्मा नाम के अभ्यर्थी ने दसवीं कक्षा की परीक्षा प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में दी और उत्तीर्ण कर ली।
बोर्ड ने सीरियल नंबर 1129889 के तहत सर्टिफिकेट जारी किया, लेकिन अभ्यर्थी दसवीं कक्षा में बैठने के लिए पात्र ही नहीं था। बोर्ड के परीक्षा नियमों के अनुसार दसवीं कक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थी की आयु 15 वर्ष होनी चाहिए, जबकि प्रतीक की आयु 13 वर्ष 4 माह (मार्च 2007 में) थी।
सात साल बाद रद्द किया प्रमाणपत्र
दूसरे नियम के अनुसार दसवीं की परीक्षा में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में बैठने के लिए कम से कम दो साल पहले आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। अभ्यर्थी ने यह योग्यता भी पूरी नहीं की। बोर्ड को गलती की भनक लगी तो अभ्यर्थी से पत्राचार शुरू हुआ।
आठवीं कक्षा का प्रमाण पत्र मांगा, लेकिन वह उपलब्ध नहीं करवा सका। बोर्ड ने मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की स्वीकृति प्रदान की है।
सचिव शिक्षा बोर्ड के सचिव डा. हरीश गज्जू ने कहा कि जानकारी मिलने के पश्चात प्रक्रिया को पूरा किया गया। बोर्ड से स्वीकृति मिलने के पश्चात प्रमाण पत्र को रद्द किया गया है। जांच के बाद दोषी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी।