फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   shimla police show neligency.

शिमला पुलिस चाहती तो टल सकता था खूनी संघर्ष

Fri, 30 Jan 2015 11:09 AM IST
Updated Fri, 30 Jan 2015 11:09 AM IST
विज्ञापन
shimla police show neligency.

भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए खूनी संघर्ष को टाला भी जा सकता था। शिमला की स्मार्ट पुलिस अगर समय रहते स्थिति पर नियंत्रण कर लेती तो मामला तूल नहीं पकड़ता। सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस देरी से पहुंची।

विज्ञापन


सूचना के बावजूद पुलिस पहले ही मौके पर क्यों नहीं पहुंची, क्यों पहले ही पर्याप्त फोर्स वहां भेजी नहीं गई, ये सब सवाल शिमला पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। साथ ही कार्रवाई तब शुरू की जब दोनों गुटों के बीच हाथापाई और पथराव खत्म होने वाला था।
विज्ञापन


भाजपा का भी दावा है कि आरोप है कि पुलिस फोर्स अगर समय पर मौके पर पहुंच जाती तो खूनी संघर्ष नहीं होता। पुलिस ने घटना होने के बाद कार्रवाई की।

खुद की जान बचाती दिखी पुलिस

shimla police show neligency.

युवा कांग्रेस के चक्कर पहुंचने से पहले मौके पर सिर्फ 20 से 25 कर्मी थे। पथराव और संघर्ष होने के बाद पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। कहीं से सडन प्रोवोकेशन होने के कारण यह मामला बिगड़ गया।

पुलिस के जवान बीच-बचाव करते रहे। कई जगह तो खुद ही जवान अपनी रक्षा के लिए भागते फिरे दिखे। सभी पक्षों की ओर से तीन एफआईआर दर्ज कर ली गई हैं। डीजीपी हिमाचल संजय कुमार का कहना है कि एसपी शिमला मामले की तहकीकात कर रहे हैं।

वहीं, एसपी शिमला डीडब्‍ल्यू नेगी का कहना है कि सुबह से ही बीजेपी कार्यालय के बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। इनके अलावा एएसपी, डीएसपी, आईपीएस (प्रोबेशनल) सहित करीब आधा दर्जन पुलिस अफसर मौके पर थे। क्यूआरटी भी मौके पर मौजूद थी। अगर समय रहते पुलिस इस टकराव को नहीं टालती तो स्थिति कुछ और होती।

एसपी पर भी लगे हैं गंभीर आरोप

shimla police show neligency.

एसपी शिमला डीडब्‍ल्यू नेगी सीएम वीरभद्र के बेहद करीबी माने जाते हैं। शिमला में एसपी बनाने पर भी उनके उपर सवाल उठे थे। भाजपा कई बार उन्हें निशाना बना चुकी है। भाजपा का कहना है कि एसपी एकतरफा कार्रवाई करते हैं।

पुलिस को जब मालूम था कि युकां कार्यकर्ता मौके पर मारपीट कर सकते हैं तो फिर खुद पुलिस अफसर मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। भाजपा के कई कार्यकर्ता यहां तक दावा कर रहे हैं कि एसपी ही विक्रमादित्य को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

इन्होंने एसपी शिमला को बर्खास्त करने की मांग कर दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed