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शातिर ग्रामीण डाक सेवक ने हड़प डाला गरीबों का पैसा, हाईकोर्ट से मिली सजा

Thu, 22 Mar 2018 01:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Thu, 22 Mar 2018 01:52 PM IST
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one year imprisonment to gramin dak sevak by himachal high court

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकारी धन का गबन करने वाले ग्राम डाक सेवक मूलचंद की सजा को बरकरार रखते हुए निचली अदालतों द्वारा पारित फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने याचिकाओं को खारिज करते हुए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रार्थी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं।

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प्रार्थी जिस क्षेत्र में नौकरी करता था स्थानीय निवासी होने के अलावा उस क्षेत्र के लोगों के विश्वास का समाज में आनंद उठा रहा था। उसने उन्हीं लोगों को धोखा दिया। गरीब और दूरदराज क्षेत्र से संबंध रखने वाले ग्रामीणों व अज्ञान महिलाओं की गाढ़ी कमाई को उसने गैर कानूनी तरीके से खुद के लिए इस्तेमाल किया। न्यायालय ने कहा कि यह प्रार्थी किसी भी तरीके से न्यायालय द्वारा नरमी बरते जाने का हक नहीं रखता है। हाईकोर्ट ने एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा। 

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57,500 रुपये का गबन

one year imprisonment to gramin dak sevak by himachal high court

अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार 14 अगस्त 2001 को रामपुर तहसील पोस्ट ऑफिस के इंस्पेक्टर ने पुलिस स्टेशन निरमंड के समक्ष सरकारी धन के गबन के आरोप को लेकर प्रार्थी ग्रामीण डाक सेवक के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।

शिकायत के अनुसार प्रार्थी ने निथर सब पोस्ट ऑफिस में कार्य करते कुल 57,500 रुपये का गबन किया और रफू चक्कर हो गया। आरोप था कि उसने कुछ आवर्ती खातों के पैसे जमा करवाने के बजाए खुद हजम कर लिए।

यह भी आरोप था कि उसने इंदिरा विकास पत्र के तहत प्राप्त धन को असली उपभोक्ता को देने के बजाय खुद ही हड़प लिया। न्यायिक दंडाधिकारी ने उसे एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने भी बरकरार रखा था।

कसौली सर्कल में घटिया मेटलिंग पर हाईकोर्ट सख्त

one year imprisonment to gramin dak sevak by himachal high court

प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली सर्कल के तहत आने वाली सड़कों पर लोक निर्माण विभाग की ओर से कराई जा रही घटिया मेटलिंग के मामले में जूनियर इंजीनियर राकेश कुमार, राजिंदर सिंह, गुरबचन सिंह, ज्ञान सिंह ठाकुर, असिस्टेंट इंजीनियर भूप सिंह राणा, रंजन कुमार गुप्ता, अधिशाषी अभियंता संदीप कुमार सोबती और व कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाने के आदेश दिए।

यह सभी अधिकारी जनवरी 2016 से दिसंबर 2017 तक कसौली सर्कल में तैनात थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने रिश्वत निरोधक एवं सामाजिक कल्याण संघ कसौली की ओर से लिखे पत्र पर संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका में यह आदेश पारित किए।

मामले में नियुक्त एमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि इस घपले में ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत प्रतीत हो रही है। यह मिलीभगत का ही नतीजा था कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की ओर से सड़क की मेटलिंग व रखरखाव में की खामियां उजागर करने और ठेकेदार की ओर से समय पर काम पूरा न किए जाने के बावजूद करोड़ों की पेमेंट जारी कर दी गई।

हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि कसौली सर्कल में पड़ने वाली पीडब्ल्यूडी की सड़कों की मात्र 2 माह पहले टारिंग की गई थी, जो अब उखड़ गई है। सरकार ने करोड़ों रुपये इस काम के लिए खर्च किया। अब इस रोड पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इस मामले में खुलेआम सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। इसलिए हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार व इंजीनियरों के खिलाफ  उपयुक्त कार्रवाई की जाए।

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