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दोहरे हत्याकांड में 5 लोगों को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Thu, 27 Nov 2014 03:37 PM IST
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नगर परिषद सोलन की पूर्व पार्षद रजिया उर्फ रत्नी नानी और देसराज महंत बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के पांचों आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेम पाल रांटा की अदालत ने पांचों को कत्ल और लूटपाट की धाराओं के तहत उम्रकैद और 10 साल की सजा सुनाई है। वहीं एक दोषी को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल कठोर कारावास की सजा अलग से सुनाई है।
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सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी जिला उप न्यायवादी मोहेंद्र कुमार शर्मा ने की। 29 गवाहों समेत पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। 302/120-बी आईपीसी के तहत पांचों को उम्रकैद और 5000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर 3 माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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वहीं 396/120 के तहत 10 साल कैद और तीन हजार जुर्माने के आदेश दिए हैं। जुर्माना न देने पर दो माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं पांचों में से वकार चौधरी को अंडर सेक्शन 25 आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। जुर्माना न देने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा होगी।
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प्रिया और मनीष को शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में दोनों के खिलाफ सुबूत नहीं मिले और उन्हें छोड़ दिया गया। 27 जुलाई, 2011 को मामले को अनट्रेस रिपोर्ट के साथ कोर्ट में सबमिट किया गया। 1 नवंबर 2011 को दिल्ली पुलिस से फैक्स मैसेज मिला कि पांचों आरोपियों को एक मामले में पकड़ा गश्स है जिन्होंने दोहरे हत्याकांड को भी कुबूला है।
छानबीन में यह सच सामने आया कि आशा ने रजिया के साथ कुछ देर काम किया था। इस दौरान वह रजिया की धन दौलत से अच्छी तरह वाकिफ थी। इसके चलते उसने चारों दोषियों के साथ मिलकर हत्या के मामले को अंजाम दिया।
सभी दोषी दिल्ली और यूपी के
मामले में संलिप्त वकार चौधरी पुत्र अली हसन निवासी मोहल्ला चौधरियां बिग हाउस नजदीक नगरपालिका पीओ मुक्तेश्वर जिला हापुर यूपी, वर्तमान निवासी हाउस नंबर-ए-111 गली नंबर दो भजनपुरा दिल्ली का है। दलीप पुत्र राज कुमार निवासी हाउस नंबर डी-188, गली नंबर 8 भागीरथी बिहार, पीएस गोकुलपुरी दिल्ली-94, मुर्तजिम उर्फ बबलू पुत्र नसीम अहमद मोहल्ला दानिश मदान पीएस कोतवाली अमरोहा जिला जेपी नगर यूपी वर्तमान निवासी नंबर 814 डी ब्लाक गली नंबर 20-सी गांव दी रोड भजनपुरा दिल्ली, इकबाल खान पुत्र असलम खान निवासी झुग्गी नंबर टीएच/107 राजीव गांधी कैंप कैलाश नजदीक ओल्ड आयरन ब्रिज आफ यमुना रिवर दिल्ली-31 और आशा उर्फ सरफुति पुत्री साहेब असलम निवासी गांव कमोटी, पीएस टीहरा गंज जिला किशनगंज बिहार को दोषी करार देकर कोर्ट ने सजा सुनाई है।
यह है मामला
रजिया उर्फ रत्नी नानी, देस राज महंत, प्रिया महंत, मनीष और राजेश सभी किन्नर डिग्री कॉलेज सोलन के पास रजिया की खुद की बिल्डिंग में रहते थे। रजिया और देसराज बीमारी के चलते घर में ही रहते थे और शेष बधाई कलेक्शन के लिए जाते थे। 29 अक्तूबर 2009 को दोपहर तीन बजे जब सभी घर वापिस पहुंचे तो रजिया लहुलूहान फर्श पर पड़ी थी और देसराज महंत दूसरे कमरे में प्लास्टिक की रस्सियों से बंधा हुआ था। गर्दन और छाती पर अनगिनत चाकू के वार हुए थे जिससे दोनों की मौत हो गई। पुलिस थाना सदर में 302, 396, 380/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।