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ज्योति मर्डर केसः अब जांच अफसरों के खिलाफ जांच

Wed, 17 Sep 2014 11:12 AM IST
Updated Wed, 17 Sep 2014 11:12 AM IST
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jyoti murder case: inquirey against investigating officers.

ज्योति हत्याकांड की तफ्तीश में पंचकूला पुलिस की किरकिरी होने के बाद पुलिस विभाग ने इस मामले की जांच करने वाले तत्कालीन अफसरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। पंचकूला पुलिस की लापरवाही के कारण इस मामले के सभी 12 आरोपी अदालत से बरी हो गए।

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अदालत के फैसले की कॉपियां मिलने के बाद मुख्य रूप से तत्कालीन एसीपी वीरेन्द्र सांगवान और इंस्पेक्टर अजय राणा की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी।
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पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, ज्योति हत्याकांड की जांच से जुड़े तमाम पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका और कमियों की जांच की जा रही है।

सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

jyoti murder case: inquirey against investigating officers.

इस मसले पर पुलिस आयुक्त और आला अधिकारियों की बैठक भी हुई, जिसमें कुछ अहम फैसले लिए गए हैं। जांच में कमी के लिए जो दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस आयुक्त अजय सिंघल ने कहा कि कोर्ट से फैसले की प्रतियां मिलने के बाद इस पूरे प्रकरण और जांच से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही अगला कदम उठाया जाएगा।

इन कमियों का भी मिला लाभ
पुलिस ने जांच के दौरान ज्योति की मौत से पहले अपने पिता और एक अन्य शख्स से हुई बातचीत के बारे में भी जानकारियां नहीं जुटाईं। इसके अलावा पुलिस ज्योति के साथ विधायक रामकुमार चौधरी के रिश्ते को सिद्ध करने में भी नाकाम रही। नतीजतन, केस कमजोर होता चला गया।

जांच में बरती ये लापरवाही

jyoti murder case: inquirey against investigating officers.

चंडीगढ़ के सेक्टर-20 के नर्सिंग होम में ज्योति का अबॉर्शन हुआ था। वहां की डा. अदिति ने विधायक रामकुमार चौधरी को पहचानने से इनकार कर दिया, लेकिन इस मामले से जुड़े डा. गुरप्रीत से पुलिस ने पूछताछ नहीं की। यहां भी पुलिस की कमजोरी साबित हुई।

मोबाइल की रिकवरी साबित नहीं कर सकी पुलिस
ज्योति की हत्या के बाद पुलिस का कहना था कि आरोपी गुरमीत के कब्जे से मोबाइल रिकवर किया गया था, लेकिन गुरमीत के भाई प्रवीण ने बयान दिया कि यह फोन उसकी कंपनी के कर्मी इस्तेमाल करते हैं और गुरमीत ने इसका इस्तेमाल ही नहीं किया। पुलिस इस मोबाइल की रिकवरी को भी साबित नहीं कर सकी।

कॉल डिटेल्स में खामियों ने कमजोर किया केस
ज्योति हत्याकांड की सुनवाई के दौरान आरोपियों की मोबाइल कॉल डिटेल्स के साथ सर्टिफिकेट पेश नहीं किए जाने की वजह से केस कमजोर हो गया। पुलिस की ओर से पेश सुबूतों में मोबाइल कॉल डिटेल्स को अहम बताया गया, लेकिन यह मान्य हो, इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं ही पूरी नहीं की गई।

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