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यहां लहलहा रही अफीम-चरस की खेती
ब्यूरो/अमर उजाला, बंजार (कुल्लू)
Updated Mon, 16 May 2016 10:28 AM IST
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पुलिस की आंखों से दूर नशे के सौदागर अफीम और चरस पैदा कर रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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नशे को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए भले ही पुलिस हर साल अभियान चलाती है, लेकिन चरस और अफीम की खेती को नष्ट करने में अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। उपमंडल बंजार के ऊंचाई वाले इलाकों में सैकड़ों बीघा वन भूमि पर चरस और अफीम की खेती लहलहा रही है। अफीम को उपमंडल के दुर्गम इलाकों में बीजा गया है।
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यहां पुलिस और नारकोटिक्स की टीमें आसानी से नहीं पहुंच सकतीं। पुलिस की आंखों से दूर नशे के सौदागर अफीम पैदा कर रहे हैं। वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। इस कारोबार से जुड़े लोगों ने अब अपने खेतों की बजाय ऊंचे क्षेत्रों में वन भूमि पर अवैध रूप से भांग और अफीम की खेती करने का काम शुरू किया है।
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सरकार ने भांग और अफीम की खेती पर रोक लगाई है। बावजूद इसके हर वर्ष भांग और अफीम निकाली जा रही है। जिला कुल्लू में वर्ष 2015-16 में 135 किलोग्राम से अधिक चरस पकड़ी है। सूत्रों की मानें तो आजकल अफीम और चरस की बिजाई करने वाले लोग जंगलों में डेरा डाले हैं। जो अफीम तैयार हो गई है, उसे निकालने का काम भी मजदूरों से करवाया जा रहा है। इसके लिए मजदूरों को अच्छी दिहाड़ी भी दी जा रही है।
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पटवारी, बीट वनरक्षक जवाबदेह
पुलिस अधीक्षक कुल्लू पदम चंद ने कहा कि अफीम की खेती करने वाले लोगों के साथ हलका पटवारी, बीट वनरक्षक भी जवाबदेह होंगे। बंजार के बठाहड़, नोहांडा, खाड़ागाड़, पलदी, पनिहार कलवारी, श्रीकोट, शरची, तुंग, मशियार, तांदी, सराज क्षेत्रों में अफीम को नष्ट करने का अभियान छेड़ा जा रहा है। जो भी इस कारोबार में संलिप्त पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।